जैसलमेर जिले के 23 सितंबर, बुधवार को जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित होने वाली महत्वपूर्ण बैठक के दौरान जिले की कुल 10 पंचायत समितियों के प्रधान पदों, 150 पंचायत समिति सदस्यों और 21 जिला परिषद सदस्यों के लिए आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी। रोटेशन नियम तय करेंगे तस्वीर राज्य स्तर पर पहले ही जैसलमेर जिला प्रमुख की कुर्सी अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए आरक्षित की जा चुकी है। अब सबकी निगाहें पंचायत समिति स्तर पर होने वाले मंथन पर टिकी हैं। नियमों और जनसांख्यिकीय आंकड़ों के मुताबिक, जैसलमेर पंचायत समिति क्षेत्र में एसटी वर्ग की आबादी का अनुपात सबसे अधिक है, जिसके चलते यहां का प्रधान पद एसटी के खाते में जाना लगभग तय माना जा रहा है। इसके अलावा, रामगढ़ और मोहनगढ़ पंचायत समितियों में अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग का घनत्व काफी मजबूत है, जिससे इन दोनों ही महत्वपूर्ण सीटों पर एससी वर्ग काबिज हो सकता है। ओबीसी और सामान्य सीटों पर संशय और गणित अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के आरक्षण को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि पूर्व के चुनावों में सांकड़ा और भणियाणा पंचायत समितियां ओबीसी के लिए आरक्षित रह चुकी हैं। यदि रोटेशन नीति के तहत इन दोनों को इस बार लॉटरी प्रक्रिया से बाहर रखा जाता है, तो दौड़ में फतेहगढ़, खुहड़ी, रामदेवरा, नाचना और राजमथाई जैसी पांच समितियां शेष बचती हैं। इनमें से किन्हीं दो जगहों पर ओबीसी आरक्षण आने की संभावना है, जबकि बची हुई पांच पंचायत समितियां पूरी तरह से सामान्य वर्ग के लिए खुली रहेंगी। महिला आरक्षण से बदलेगा गणित विभिन्न श्रेणियों में आरक्षण का कोटा फाइनल होने के बाद, सभी वर्गों में 50 प्रतिशत महिला आरक्षण के लिए अलग से ड्रा निकाला जाएगा। एससी की दो सीटों में से एक, सामान्य की पांच में से दो या तीन तथा ओबीसी की दो में से एक सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होना तय है। इस त्रिस्तरीय महिला आरक्षण के चलते कई पुराने और कद्दावर नेताओं को अपनी सियासी जमीन बचाने के लिए घर की महिलाओं को चुनावी मैदान में उतारने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। जैसलमेर जिले के पंचायती राज चुनावों और आरक्षण की स्थिति: