स्वर्ण नगरी जैसलमेर में शारदीय नवरात्र पर्व को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। आश्विन शुक्ल प्रतिपदा यानी रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से शारदीय नवरात्र पर्व की शुरुआत होगी, जो 20 अक्टूबर 2026 तक चलेंगे। इस बार सप्तमी तिथि की वृद्धि होने के कारण भक्तों को मां दुर्गा की आराधना के लिए पूरे 10 दिन मिल सकेंगे। युवा ज्योतिषाचार्य उमेश आचार्य ने बताया कि नवरात्र के पहले दिन यानी रविवार को घटस्थापना का अत्यंत शुभ मुहूर्त सुबह 9:37 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक रहेगा। पूजन और अनुष्ठान की विधि उमेश आचार्य ने बताया कि नवरात्र व्रत का आरंभ करते समय सर्वप्रथम भगवान गणेश, मातृका, लोकपाल, नवग्रह और वरुण पूजन के साथ वेद विधि से देवी का पूजन अवश्य करना चाहिए। नवरात्रि के इन पवित्र दिनों में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का पूजन और दुर्गा सप्तशती का पाठ करना विशेष फलदायी होता है। दशांश हवन और ब्राह्मण भोजन का महत्व 'ज्योतिष भास्कर' एवं 'ज्योतिष विश्व गौरव' की उपाधि से विभूषित आचार्य ने बताया कि अपने अभीष्ट कार्य की सिद्धि के लिए विधि-विधान के साथ नवरात्र का व्रत रखकर दशांश हवन और ब्राह्मण भोजन अवश्य कराना चाहिए। 10 दिनों तक चलने वाले इस महापर्व को लेकर मंदिरों और घरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। आंतरिक ऊर्जा को जागृत करने का पर्व शारदीय नवरात्र मुख्य रूप से बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी काल में मां दुर्गा ने लगातार 9 दिनों और 9 रातों तक भीषण युद्ध के बाद महाशक्तिशाली असुर महिषासुर का वध किया था। इसके अलावा, भगवान राम द्वारा रावण पर विजय प्राप्त करने से पहले समुद्र तट पर मां दुर्गा की 9 दिनों तक की गई उपासना (अकाल बोधन) का प्रसंग भी इसी पर्व से जुड़ा है। यह पर्व आत्म-शुद्धिकरण, संयम, और आंतरिक ऊर्जा को जागृत करने का पावन अवसर है।