सलूंबर में राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंधन (मैनेज), हैदराबाद और राजस्थान सरकार के मत्स्य विभाग ने मिलकर जयसमंद में मत्स्य पालकों के लिए 'एक्वा रीच' कार्यक्रम किया। इसका मकसद जयसमंद और डाया बांध की मत्स्य उत्पादक सहकारी समितियों के सदस्यों को मछली पालन से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें इस काम में मजबूत बनाना था। इस कार्यक्रम में मत्स्य सहकारी समितियों के कुल 62 सदस्यों ने हिस्सा लिया। मेहमान और प्रतिभागियों का किया स्वागत कार्यक्रम की शुरुआत में मत्स्य विभाग की उप निदेशक डॉ. दीपिका पालीवाल ने मेहमानों और सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने कार्यक्रम के उद्देश्यों के बारे में बताया। इस दौरान जयसमंद में शून्य राजस्व मॉडल के तहत आदिवासी मछुआरों द्वारा किए जा रहे मछली पकड़ने के कामों का भी संक्षिप्त ब्यौरा दिया गया। संस्थान की गतिविधियों की जानकारी दी संयुक्त निदेशक डॉ. अनिल कुमार जोशी ने मछली पालकों को मछली पालन से जुड़ी सरकारी योजनाओं और उनके तहत मिलने वाले अनुदान व सहायता के बारे में विस्तार से बताया। मैनेज, हैदराबाद के कार्यक्रम समन्वयक महिपाल सिंह ने भी प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने कार्यक्रम के उद्देश्य और संस्थान की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। विभाग के पूर्व संयुक्त निदेशक डॉ. अकील अहमद ने जयसमंद में शून्य राजस्व मॉडल चलाने में मत्स्य सहकारी समितियों को आ रही मुश्किलों और उनके संभावित हल पर आदिवासी मछली पालकों के साथ लंबी चर्चा की। उन्होंने जयसमंद में बनी मत्स्य सहकारी समितियों से कहा कि वे नियमित ऑडिट कराएं, साधारण सभा की बैठकें करें और सहकारिता विभाग से तालमेल बिठाकर तय समय पर चुनाव प्रक्रिया पूरी करें। डॉ. अहमद ने समिति सदस्यों को नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन कराने का सुझाव भी दिया। सहायक मत्स्य विकास अधिकारी सज्जन सिंह ने प्रतिभागियों को मत्स्य सहकारी समिति बनाने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम के आखिर में डाया फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन के प्रवीन कुमार मीणा और धर्मेंद्र मीणा, सहकारी समिति पाटण के व्यवस्थापक रतनलाल और सराड़ी समिति के लोकेश मीणा ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम मछली पालकों के लिए बहुत काम के हैं। उन्होंने सरकारी योजनाओं और तकनीकी जानकारी को उनके व्यवसाय के लिए जरूरी बताया।