देवझूलनी एकादशी पर मंगलवार को जालोर शहर में विभिन्न समाजों ने ठाकुरजी की रेवाड़ियां निकालीं। माली, घांची, कुम्हार, श्रीमाली, सोनी और सुथार समाज सहित अन्य समाजों के श्रद्धालु शाम करीब 4 बजे अपने-अपने ठाकुरजी मंदिरों से गाजे-बाजे के साथ रवाना हुए। जयकारों के बीच रेवाड़ियां नगर भ्रमण करती हुईं सुंदेलाव तालाब पहुंचीं। तिलक द्वार से शोभायात्रा के रूप में रेवाड़ियां हरिदेव जोशी सर्कल और पंचायत समिति मार्ग से गुजरीं। रास्ते में श्रद्धालुओं ने ठाकुरजी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। शोभायात्रा में बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों ने उत्साह से भाग लिया। महिलाओं ने भक्ति गीतों पर डांस किया। कुरजी को स्नान कराया गया सुंदेलाव तालाब पहुंचने पर परंपरा के अनुसार ठाकुरजी को स्नान कराया गया। तालाब का पानी गंदा होने के कारण स्नान के लिए अलग से पवित्र जल लाया गया था। इसके बाद रेवाड़ियों को विश्राम स्थल पर रखा गया, जहां महिलाओं ने लूर नृत्य किया। विभिन्न समाजों की ओर से धार्मिक आयोजन हुए और सभी रेवाड़ियों की सामूहिक महाआरती की गई। शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने प्रसाद का भोग लगाकर आशीर्वाद लिया। आरती के बाद समाजबंधु ढोल-नगाड़ों के साथ रेवाड़ियों को अपने-अपने मंदिरों में वापस ले गए और ठाकुरजी को स्थापित किया।