बालोतरा जिले में मौजूद श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल में लोकआस्था की देवी श्री राणीसा भटियाणीसा का जन्मोत्सव भाद्रपद शुक्ल पक्ष सप्तमी को बहुत श्रद्धा और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। दो दिन चले इस जन्मोत्सव में धार्मिक कार्यक्रम, भजन और मालाणी की लोक-संस्कृति का सुंदर मेल देखने को मिला। बड़ी संख्या में आए श्रद्धालुओं के जयकारों, ढोल-थाली और नगाड़ों की आवाज से जसोल धाम का माहौल भक्तिमय हो गया। जन्मोत्सव की शुरुआत 17 सितंबर की रात एक बड़े जागरण से हुई। इसमें कूटला खान, जसू खान, हाकम खां और उनकी मंडली ने श्री राणीसा भटियाणीसा, श्री सवाई सिंह जी, श्री लाल बनासा, श्री बायोसा, श्री खेतलाजी और श्री काला-गौरा भैरूजी की महिमा के भजन गाए। भजनों की धुन पर श्रद्धालु पूरी तरह भक्ति में डूब गए। आधी रात 12 बजे श्री राणीसा भटियाणीसा की खास आरती की गई। आरती के समय शानदार आतिशबाजी से आसमान रंग-बिरंगी रोशनी से भर गया। जयकारों और भक्ति संगीत के बीच जसोल धाम में आस्था का अद्भुत माहौल था। जन्मोत्सव के मौके पर संस्थान अध्यक्ष किशन सिंह जसोल के निजी घर रावलगढ़, जसोल में भी एक खास राती जोगा का कार्यक्रम रखा गया। शुक्रवार, 18 सितंबर को भाद्रपद शुक्ल पक्ष सप्तमी की सुबह मंगला आरती के साथ जन्मोत्सव के मुख्य धार्मिक कार्यक्रम शुरू हुए। श्री राणीसा भटियाणीसा समेत मंदिर परिसर के सभी मंदिरों में भोजन प्रसादी भोग और छप्पन भोग श्रद्धा के साथ चढ़ाए गए। इसके बाद कन्या पूजन हुआ और यज्ञशाला में वैदिक मंत्रों के साथ खास पूजा और हवन किया गया। यज्ञ में सभी श्रद्धालुओं और इलाके के लोगों के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना के साथ संस्थान के प्रवक्ता हरिशचंद्र सिंह जसोल ने आहुतियां दीं। संस्थान अध्यक्ष किशन सिंह जसोल ने यज्ञ में पूर्णाहुति देकर सबकी भलाई की प्रार्थना की। श्रीमाल परिवार रहा अन्नपूर्णा प्रसादम् एवं छप्पन भोग का लाभार्थी जन्मोत्सव के पावन अवसर पर स्वर्गीय शांतिबाई देवीचंद श्रीमाल (जैन) परिवार, मूल निवासी लूणी, समदड़ी एवं वर्तमान निवासी इरोड, भोजन प्रसादी (अन्नपूर्णा प्रसादम्) एवं छप्पन भोग के लाभार्थी रहे। लाभार्थी परिवार द्वारा समस्त मंदिरों में श्रद्धापूर्वक भोजन प्रसादी भोग एवं छप्पन भोग अर्पित किया गया। इस अवसर पर लाभार्थी परिवार द्वारा सर्व समाज की कन्याओं का श्रद्धा एवं विधि-विधानपूर्वक पूजन किया गया। कन्याओं को फल प्रसाद अर्पित कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया गया। कन्या पूजन के दौरान श्रद्धा, संस्कार और धर्मभाव से परिपूर्ण वातावरण रहा। बाघरेचा परिवार रहा फल प्रसाद वितरण का लाभार्थी श्री राणीसा भटियाणीसा जन्मोत्सव पर स्वर्गीय भीखम चंद लुनिया (बापजी, खैरागढ़ थान, छत्तीसगढ़) की पावन स्मृति में सुनीता धर्मपत्नी दिलीप बाघरेचा, मोहित–प्रणिता बाघरेचा तथा मधुर, मिशिका एवं मानविक बाघरेचा, मूल निवासी आसोप, जोधपुर वर्तमान निवासी बालाघाट, मध्य प्रदेश, फल प्रसाद वितरण के लाभार्थी रहे। लाभार्थी परिवार की ओर से फल प्रसाद का श्रद्धालुओं में भक्तिभाव से वितरण किया गया। इसी क्रम में श्री राणीसा भटियाणीसा को अर्पित छप्पन भोग का प्रसाद, फल प्रसाद एवं भोजन प्रसादी (अन्नपूर्णा प्रसादम्) का समस्त श्रद्धालुओं में श्रद्धा एवं धर्मभाव के साथ वितरण किया गया। हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद एवं महाप्रसादी ग्रहण कर धर्मलाभ प्राप्त किया। 51 लाख रुपए के आभूषण समर्पित श्री राणीसा भटियाणीसा के पावन जन्मोत्सव दिवस पर संजय लुनिया, कोयंबटूर एवं उनके परिवार ने अपनी श्रद्धा एवं आस्था प्रकट करते हुए 51 लाख रुपए मूल्य के आभूषण श्री राणीसा भटियाणीसा के श्रीचरणों में श्रद्धापूर्वक समर्पित किए। परिवार ने इस भेंट को श्री राणीसा भटियाणीसा के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा और समर्पण के भाव के साथ अर्पित कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। प्रबुद्धजनों की उपस्थिति में धर्मध्वजारोहण हवन-पूजन के पश्चात एवं पूर्णाहुति से पूर्व जसोल सर्व समाज सहित मालाणी क्षेत्र से पधारे सर्व समाज के गणमान्य एवं प्रबुद्धजनों की गरिमामयी उपस्थिति में संस्थान अध्यक्ष किशन सिंह जसोल ने विधि-विधानपूर्वक धर्मध्वजारोहण किया। धर्मध्वजा के आरोहण के साथ ही श्री राणीसा भटियाणीसा के जयकारों से संपूर्ण मंदिर परिसर गुंजायमान हो उठा। ढोल-थाली, गैर और नगाड़ों से सजी मालाणी की लोक-संस्कृति जन्मोत्सव में धार्मिक आस्था के साथ मालाणी की समृद्ध लोक-कला, संस्कृति एवं परंपराओं की मनोहारी छटा भी देखने को मिली। भोजन प्रसादी भोग, छप्पन भोग एवं धर्मध्वजारोहण के अवसर पर ढोलियों (दमामियों) द्वारा पारंपरिक ढोल-थाली की प्रस्तुतियां दी गईं। मालाणी सांस्कृतिक कला केंद्र, जसोल के कलाकारों ने पारंपरिक गैर नृत्य प्रस्तुत किया, वहीं पुष्कर के नगारची कलाकारों द्वारा नगाड़ा वादन एवं घुड़ नृत्य की विशेष प्रस्तुतियां दी गईं। ढोल-थाली, नगाड़ों और गैर की लय के बीच मालाणी की समृद्ध लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक वैभव की अनुपम छटा बिखरी। संस्थान के प्रवक्ता हरिशचंद्र सिंह जसोल ने बताया- जन्मोत्सव पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए संस्थान द्वारा सुगम एवं सुव्यवस्थित दर्शन, सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, स्वच्छता, पेयजल, प्रसाद एवं महाप्रसादी वितरण सहित श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़ी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं। श्रद्धालुओं के निरंतर आगमन के बीच सभी व्यवस्थाओं का सुचारु एवं सुव्यवस्थित संचालन किया गया। उन्होंने कहा कि श्री राणीसा भटियाणीसा जन्मोत्सव में आस्था, आराधना, सेवा और मालाणी की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक परंपराओं का सुंदर संगम देखने को मिला। जन्मोत्सव के दोनों दिवस श्रद्धालुओं की अपार श्रद्धा और भक्तिभाव से जसोल धाम का वातावरण भक्तिमय बना रहा। उन्होंने जन्मोत्सव में देश के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे समस्त श्रद्धालुओं, लाभार्थी परिवारों, धर्मप्रेमी बंधुओं, लोक कलाकारों, सेवाभावी कार्यकर्ताओं तथा आयोजन एवं व्यवस्थाओं में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी जनों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने श्री राणीसा भटियाणीसा से सभी श्रद्धालुओं एवं क्षेत्रवासियों के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली प्रदान करने तथा सभी पर अपनी कृपादृष्टि बनाए रखने की मंगलकामना की। देखें फोटोज..