जेईई एडवांस्ड के पेपर कितने टफ होते हैं, उसे इस आंकड़े से समझिए कि वर्ष 2026 के पेपर में चार सवाल ऐसे थे, जिसका 1 लाख 79 हजार 694 छात्रों में से केवल एक प्रतिशत से भी कम छात्र सही जवाब दे पाए। इनमें से तीन सवाल मैथ्स और एक सवाल कैमिस्ट्री का था। मैथ्स के पेपर-1 में पूछे गए सवाल नंबर 9 का सही जवाब केवल 0.12 फीसदी छात्र और सवाल नंबर 11 का सही जवाब केवल 0.72 प्रतिशत छात्र दे सके। मैथ्स के पेपर-2 में सवाल नंबर 11 को 0.65 फीसदी और कैमिस्ट्री के सवाल नंबर 15 को 0.55 फीसदी छात्र ही हल कर पाए। शेष छात्रों ने ये सवाल छोड़ दिए या फिर गलत उत्तर दिया। आईआईटी की जॉइंट इंप्लीमेंटेशन कमेटी की ओर से प्रत्येक सवाल के पेपरवाइज आंकड़े दिए हैं। भास्कर ने एडवांस्ड के पेपर और आंकड़ों का एनालिसिस किया। सामने आया कि मात्र एक सवाल को ही सबसे अधिक 60 प्रतिशत छात्रों ने सही हल किया। यह सवाल कैमेस्ट्री विषय से संबंधित था। शेष सवालों को परीक्षा देने वाले कुल छात्रों में से 50% भी सही तरीके से हल नहीं कर पाए। फिजिक्स के पेपर दो के सवाल नंबर 14 को सबसे अधिक 74.84% छात्रों ने गलत किया। जानिए‌‌... क्या पूछा गया था इन सवालों में गणित के पेपर-1 का सवाल नंबर 9 रिलेशन एंड फंक्शन से संबंधित था। इसमें छात्रों को संख्या में उत्तर देना था। प्रश्न संख्या 11 का मुख्य टॉपिक समान वस्तुओं का वितरण से ताल्लुक रखता था। इसमें छात्रों को सभी संभव वितरणों की संख्या ज्ञात करनी थी। इसी प्रकार गणित के पेपर दो का नंबर 10 का रिलेशन एंड फंक्शन से संबंधित था और छात्रों को सवाल में मौजूद कुल फंक्शन को निकालना था। कैमिस्ट्री का 15वें नंबर का सवाल विलयन के राउल्ट का नियम और वाष्प दाब से संबंधित था। पहले से तय नहीं होता एडवांस्ड का पैटर्न : जेईई एडवांस्ड का पेपर पैटर्न पहले से तय नहीं होता है। छात्रों को यह भी नहीं पता कि कुल कितने अंकों का पेपर आएगा। पेपर-1 और पेपर-2 तय होते हैं। यह पेपर एक ही दिन में दो शिफ्ट में आयोजित किया जाता है। मार्किंग स्कीम कुल अंकों के आधार पर बदलती रहती है। ऐसा बहुत कम एग्जाम में होता है। यह भी कारण है कि जेईई एडवांस्ड को देश के सबसे मुश्किल एग्जाम में गिना जाता है। हर साल परीक्षा करवाने वाली आईआईटी भी बदलती रहती है। भास्कर एक्सपर्ट व्यू - आशीष अरोड़ा, जेईई व नीट एक्सपर्ट छात्र उलझे और लंबे सवालों तक पहुंच ही नहीं पाते हैं जो सवाल एक बार पढ़ने में समझ में आ जाते हैं। छात्र उसे पहले हल करते हैं। दूसरे फेज में थोड़े उलझे सवालों को हल करने में छात्रों का काफी समय निकल जाता है। ऐसे में ट्रिकी और भाषा में लंबे सवालों तक छात्र पहुंच ही नहीं पाते। जिन सवालों को एक प्रतिशत से कम स्टूडेंट्स ने हल किया है, उनकी स्पीड और एक्यूरेंसी बहुत अच्छी रही होगी। इस साल कैमेस्ट्री मॉडरेट और मैथ्स टफ थी।