झालावाड़ के अनंग कुमार जैन स्मृति भवन में रविवार को आलाप संगीत संस्थान की ओर से “सुरमई यादों का कारवां” संगीत संध्या का आयोजन किया गया। लता मंगेशकर के जन्मदिन और आशा भोसले की याद में आयोजित कार्यक्रम में लता मंगेशकर के साथ एस.पी. बालासुब्रमण्यम, महेंद्र कपूर, हेमंत कुमार, मोहम्मद रफी और मुकेश जैसे महान गायकों के सदाबहार गीतों की प्रस्तुतियां दी गईं। देर रात तक चले कार्यक्रम में कलाकारों ने पुराने फिल्मी संगीत की यादें ताजा कर दीं। नारी शक्ति ने दीप प्रज्वलित कर की शुरुआत कार्यक्रम का शुभारंभ नारी शक्ति ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसमें प्रिया गुप्ता, शालिनी पारिक, रेखा नाथ, भारती टेलर, योगिता गुप्ता और उज्ज्वला कानोडे शामिल रहीं। प्रिया गुप्ता, प्रकाश चंद्र सोनी और शालिनी पारिक मुख्य अतिथि रहे। सदाबहार गीतों से सजी सुरों की महफिल संगीत संध्या में तिथी गुप्ता, बलदेव राज भाटिया, खुशी कानोड़े, हरीश शर्मा, सिराज कुरैशी, शालिनी पारिक, भारती टेलर, देवेंद्र राजपुरोहित, संजू शर्मा, उज्ज्वला कानोड़े, पुष्पलता दुबे और कोमल-भारती समेत कई कलाकारों ने लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किए। पंकज खंडेलवाल ने “दिल चीज क्या है”, डॉ. सागर शर्मा ने “दिल दीवाना बिन सजना के माने ना”, गुरुचरण सिंह ने “ए दिल-ए-नादान”, अनुराग एवं मेघा वर्मा ने “देखा एक ख्वाब” और सौरभ सोनी ने “आंखों में कयामत के काजल” गीत प्रस्तुत किया। प्रीति गौतम ने “जाने क्यों लोग मोहब्बत”, पवन शर्मा एवं ऋषिता शर्मा ने “मन क्यों बहका रे बहका” तथा हरीश एवं स्वाति सोनी ने “हम तुम चोरी से” गीत पेश कर समां बांध दिया। एक के बाद एक गीतों ने बांधा समां इसके बाद करण शर्मा ने “पहली बार मिले हैं” और अजय शर्मा ने “हे प्रीत जहां की रीत सदा” प्रस्तुत किया। नरेंद्र दुबे ने “तेरी आंखों के सिवा दुनिया में रखा क्या है” और “है अपना दिल तो आवारा” गीतों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। रूपेश सोनी एवं रितु सोनी ने “हमने सनम को खत लिखा”, जबकि डॉ. योगेंद्र तिवारी ने “अब तक मैं चुप रहता था” गीत प्रस्तुत किया। तालियों से कलाकारों का बढ़ाया उत्साह सदाबहार गीतों की प्रस्तुतियों पर श्रोताओं ने तालियों से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम का संचालन पुष्पलता दुबे और नरेंद्र कुमार दुबे ने किया। लता मंगेशकर, आशा भोसले, मोहम्मद रफी और मुकेश सहित अनेक महान गायकों के लोकप्रिय गीतों ने संगीत प्रेमियों को पुराने दौर की यादों से जोड़ दिया। नई पीढ़ी तक पहुंचाना है संगीत की विरासत आलाप संगीत संस्थान के प्रवक्ता हरिश्चंद्र शर्मा ने बताया कि संस्थान का उद्देश्य संगीत की समृद्ध विरासत को जीवंत रखना और महान गायकों के सदाबहार गीतों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि “सुरमई यादों का कारवां” इसी उद्देश्य को समर्पित यादगार संगीत संध्या रही। कार्यक्रम के अंत में संस्था के संरक्षक देवेंद्र राजपुरोहित और गिरिराज व्यास ने सभी संगीत प्रेमियों का आभार व्यक्त किया। इस दौरान संगीत एवं साहित्य से जुड़ी विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी और सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद रहे।