झुंझुनूं में नींबू का भाव 200 रुपए किलो तक पहुंच गए हैं। खुदरा बाजार में एक नींबू 10 से 15 रुपए में बिक रहा है। ऐसे में घरों में इसका इस्तेमाल कम होने लगा है, वहीं होटल और ढाबे वाले भी इसकी मार झेल रहे हैं। नींबू के भाव अब सेब और अनार जैसे फलों को टक्कर दे रहे हैं। बाजार में सेब 120 से 160 रुपए किलो और अनार करीब 180 रुपए किलो बिक रहा है। वहीं, नींबू के दाम 200 रुपए किलो तक पहुंच गया हैं। होटल-ढाबों को झेलने पड़ रही मार नींबू महंगा होने से होटल और ढाबा संचालकों के लिए भी अब हर ग्राहक की थाली में नींबू देना खर्च बढ़ाने वाला सौदा बन गया है। जहां पहले सलाद के साथ नींबू मिलना सामान्य माना जाता था, वहीं अब ऐसा नहीं है। व्यापारियों के अनुसार, होटल और ढाबों में रोजाना बड़ी मात्रा में नींबू की खपत होती है। ऐसे में 200 रुपए किलो के भाव पर इसकी नियमित आपूर्ति करना खर्चीला हो गया है। 15 दिन में करीब दोगुने हुए भाव व्यापारियों के मुताबिक, करीब 15 दिन पहले नींबू का थोक भाव लगभग 100 रुपए किलो था। इसके बाद बाजार में आवक कम होने लगी और कीमतें लगातार बढ़ती गईं। अब अच्छी गुणवत्ता का नींबू 160 से 200 रुपए किलो तक बिक रहा है। थोक भाव में तेजी का असर खुदरा बाजार पर भी पड़ा है। बारिश में सस्ता होने के बजाय महंगा हुआ नींबू आमतौर पर गर्मी के बाद बारिश के मौसम में नींबू की आवक बढ़ने और मांग घटने से कीमतों में राहत मिलती है। सितंबर-अक्टूबर में इसके भाव कई बार 60 से 70 रुपए किलो तक आ जाते हैं। अच्छी आवक के दौरान कीमतें 20 से 30 रुपए किलो तक भी पहुंच जाती हैं। लेकिन इस बार बाजार में उलटा रुख देखने को मिल रहा है। व्यापारियों के अनुसार, पानी की कमी से फसल प्रभावित होने के कारण मध्य प्रदेश के क्षेत्रों से पर्याप्त मात्रा में नींबू नहीं पहुंच पा रहा है। आवक कम रहने से बाजार में उपलब्धता घट गई है और कीमतों में तेजी आई है। घरों में भी कम होने लगा इस्तेमाल इंदिरा नगर निवासी गृहिणी नीतू के अनुसार नींबू रोजमर्रा की जरूरत की चीज है, लेकिन अब इसकी कीमत बढ़ने से घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है। इसे खरीदते समय भी सोचना पड़ता है। इसका असर घर की थाली के स्वाद पर भी पड़ रहा है। मान नगर निवासी सुमित्रा ने बताया कि नींबू पहले सामान्य जरूरत के हिसाब से खरीद लेते थे, लेकिन अब एक नींबू 10 से 15 रुपए का मिलने से जरूरत के मुताबिक ही खरीदना पड़ रहा है। महंगाई के कारण इसका इस्तेमाल भी कम करना पड़ रहा है। दुकानदारों के सामने भी नुकसान का डर खुदरा विक्रेता विजेंद्र का कहना है कि नींबू के थोक और खुदरा भाव में तेजी आने से कारोबार प्रभावित हो रहा है। महंगा होने के कारण ग्राहक कम मात्रा में खरीद रहे हैं। दूसरी ओर, नींबू जल्दी खराब हो जाता है, इसलिए ज्यादा माल खरीदना जोखिम भरा है। यदि बिक्री नहीं हुई तो खराब होने से नुकसान उठाना पड़ सकता है।