झुंझुनूं में नगर परिषद चुनाव में सभापति प्रत्याशी के नामांकन का आज आखिरी दिन है। हालांकि, कांग्रेस से अब्दुल्ला अगवान और भाजपा से मनु धनकड़ के अलावा अभी कोई रेस में नहीं है। ऐसे में, बाड़ेबंदी और क्रॉस वोटिंग का डर दोनों पार्टियों को है। हालांकि, कांग्रेस मजबूत स्थिति में है। 60 सदस्यीय परिषद में कांग्रेस 30 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल है, भाजपा के पास 15 और निर्दलीयों के पास 15 सीटें हैं। बहुमत का आंकड़ा 31 है। कांग्रेस को सिर्फ 1 अतिरिक्त वोट चाहिए, जबकि भाजपा को अपने 15 के अलावा 16 पार्षदों का समर्थन जुटाना होगा। 12 साल बाद 2014 की याद आई कांग्रेस के लिए 1 वोट कांग्रेस के पास 30 पार्षद हैं। बहुमत के लिए 31 चाहिए। अप्रत्यक्ष चुनाव में यही एक वोट पूरा समीकरण बदल सकता है। यदि कांग्रेस के 30 पार्षद एकजुट रहते हैं और उसे कम से कम एक अतिरिक्त वोट मिल जाता है, तो वह बहुमत के आंकड़े तक पहुंच जाती है। लेकिन यदि उसके खेमे में सेंध लगती है, कोई पार्षद क्रॉस वोट करता है या समर्थन के समीकरण में अंतिम समय पर बदलाव होता है, तो मुकाबला पूरी तरह बदल सकता है। इसीलिए कांग्रेस को सबसे ज्यादा चिंता अपने आंकड़े को सुरक्षित रखने की है। भाजपा को 16 मनाने होंगे भाजपा के पास 15 पार्षद हैं। मौजूदा गणित में उसे बहुमत तक पहुंचने के लिए 16 अतिरिक्त समर्थन चाहिए। इसलिए भाजपा के सामने सिर्फ निर्दलीयों का समर्थन हासिल करने की चुनौती नहीं है, बल्कि कांग्रेस के घोषित 30 के आंकड़े में भी सेंध लगाने की जरूरत होगी। राजनीतिक समीकरण में अब तीन संभावनाओं पर नजर: ये था 2014 का रिजल्ट