झुंझुनूं में इस बार सरपंची का चुनाव बदले हुए पंचायत नक्शे के बीच होगा। पुनर्गठन के बाद जिले में 66 नई ग्राम पंचायतें बनी हैं। जहां पहली बार सरपंच चुना जाएगा। वहीं 148 ग्राम पंचायतों की सीमाओं में बदलाव हुआ है। कहीं नए गांव जुड़े हैं तो कहीं पुराने गांव अलग हुए हैं। ऐसे में नई पंचायतों में पहली बार नए दावेदार और नए मतदाता समूह आमने-सामने होंगे, जबकि बदली पंचायतों में पुराने राजनीतिक समीकरणों को नए सिरे से आकार लेना होगा। पुनर्गठन के बाद जिले में ग्राम पंचायतों की संख्या 389 हो गई है। नई पंचायत में पहली बार होगा सरपंची का मुकाबला 66 नई पंचायतों में इस बार सबसे ज्यादा उत्सुकता सरपंच पद के चुनाव को लेकर है। इन पंचायतों में स्थानीय राजनीति का नया अध्याय शुरू होगा। यहां गांव के प्रभावशाली परिवार, पूर्व वार्ड पंच, पंचायत समिति सदस्य रह चुके नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और युवा दावेदार मैदान में उतर सकते हैं। कई जगह पुराने गांवों के दो या अधिक राजनीतिक गुट नई पंचायत में पहली बार आमने-सामने होंगे। सबसे खास बात यह है कि नई पंचायत बनने के बाद किसी पुराने चुनाव परिणाम को देखकर यह तय करना मुश्किल होगा कि कौन मजबूत है। नई पंचायत में नया गांव, नया मतदाता और नया समीकरण—यही इस चुनाव की सबसे बड़ी खासियत होगी। कहां-कहां बनीं नई ग्राम पंचायतें सात पंचायतें शहर बनीं, गांवों का नक्शा भी बदला पिछले छह साल में झुंझुनूं के ग्रामीण नक्शे में एक बड़ा बदलाव यह भी हुआ कि सुलताना, सिंघाना, मंड्रेला, मलसीसर, बुहाना, डूंडलोद और जाखल को नगर निकाय का स्वरूप मिला और इनके ग्रामीण पंचायत ढांचे पर असर पड़ा। अब यहां पंचायत की जगह पालिका चुनाव 148 पंचायतों में बदले समीकरण नई पंचायतों से अलग दूसरी बड़ी कहानी उन 148 ग्राम पंचायतों की है, जिनकी सीमाओं में बदलाव हुआ। कहीं पंचायत का क्षेत्र छोटा हुआ तो कहीं उसमें नया गांव जोड़ा गया। इसका सीधा असर पुराने सरपंचों और दावेदारों के वोट बैंक पर पड़ेगा। चुनावी तस्वीर का सार