करौली नगर निकाय चुनाव के नतीजे आने के बाद नगरपरिषद की नई तस्वीर सामने आई है। 55 वार्डों वाली नगरपरिषद में इस बार 23 महिलाएं पार्षद चुनी गई हैं, जबकि 32 वार्डों में पुरुष प्रत्याशी जीते हैं। इस तरह परिषद में महिलाओं की भागीदारी करीब 42 प्रतिशत रही है। गत बार (2020 में) हुए करौली नगरपरिषद के चुनाव में 26 महिला प्रत्याशी निर्वाचित हुई थी, जबकि इस बार यह आंकड़ा 23 का रहा है। इस प्रकार इस बार नगरपरिषद बोर्ड में गत चुनाव के मुकाबले 3 महिला पार्षदों का प्रतिनिधित्व कम रहा है। गत बार के चुनाव में कुल 55 वार्डों में से 29 पुरुष प्रत्याशी निर्वाचित हुए थे, जबकि 26 महिला प्रत्याशी निर्वाचित हुई थी। इस बार महिला प्रतिनिधित्व के मामले में कांग्रेस सबसे आगे है। कांग्रेस के 28 विजयी पार्षदों में 12 महिलाएं हैं। यानी कांग्रेस के कुल विजेताओं में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 43 प्रतिशत है। वहीं, भाजपा के 11 विजयी पार्षदों में तीन महिलाएं हैं, जिससे भाजपा में महिला प्रतिनिधित्व करीब 27 प्रतिशत रहा है। 15 निर्दलीयों विजेताओं में 7 महिलाएं निर्दलीय प्रत्याशियों में भी महिलाओं की अच्छी भागीदारी रही। 15 निर्दलीय विजेताओं में 7 महिलाएं हैं, जबकि 8 पुरुष हैं। बसपा की एकमात्र विजेता भी महिला है। इस तरह पार्टी के हिसाब से कांग्रेस की महिला पार्षदों की संख्या सबसे ज्यादा है। नई परिषद में महिला पार्षदों की उम्र भी अलग-अलग वर्गों का प्रतिनिधित्व करती है। सबसे कम उम्र की महिला विजेताओं में वार्ड 37 की गजाला खानम और वार्ड 38 की इफा खानम शामिल हैं, दोनों की उम्र 25 वर्ष है। वहीं, वार्ड 1 की हेमलता सोनी 67 वर्ष की उम्र में चुनी गई हैं। वार्ड 47 की सुआबाई 64 वर्ष और वार्ड 40 की विमला 62 वर्ष की हैं। इससे परिषद में युवा महिलाओं के साथ वरिष्ठ महिलाओं का भी प्रतिनिधित्व सामने आया है। नई परिषद में चुनी गई 23 महिला पार्षदों में कांग्रेस की 12, भाजपा की तीन, निर्दलीय सात और बसपा की एक महिला शामिल है। कुल महिला पार्षदों में आधे से ज्यादा कांग्रेस से हैं। वहीं, पुरुष पार्षदों की संख्या 32 है। इनमें कांग्रेस के 16, भाजपा के आठ और निर्दलीय आठ पुरुष पार्षद शामिल हैं। नई परिषद की यह तस्वीर बताती है कि करौली नगरपरिषद में महिला प्रतिनिधित्व अब सिर्फ आरक्षित वार्डों तक सीमित नहीं है, बल्कि परिषद की कुल संरचना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।