करौली में 250 साल पुरानी सांझी बनाने की परंपरा आज भी कायम है। श्राद्ध पक्ष के दौरान 15 दिनों तक महिलाएं घरों में गोबर और रंगों से सांझी बनाकर पूजा करती हैं। इस परंपरा का समापन शनिवार को अमावस्या पर विशेष आयोजन के साथ हुआ। भूड़ारा बाजार और वैशाली नगर जैसे इलाकों में शाम के समय महिलाएं सांझी तैयार करती हैं। इसे फूलों और रंगों से सजाकर विधि-विधान से पूजा की जाती है। हर दिन सांझी को अलग-अलग तरीके से सजाया जाता है। इस दौरान घरों में महिला संगीत, भजन और नृत्य कार्यक्रम भी होते हैं। महिलाएं समूह में धार्मिक गीत गाकर इस परंपरा को जीवंत रखती हैं। मदनमोहन मंदिर से जुड़ी इस परंपरा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही परंपरा महिलाओं को एक साथ जोड़ती है और स्थानीय संस्कृति व लोक आस्था को आगे बढ़ाती है।