दशहरा और दीपावली की छुट्टियों के साथ ही घरेलू पर्यटन का सीजन शुरू होने जा रहा है। ऐसे में केरल टूरिज्म की नजर राजस्थान सहित उत्तर भारत के पर्यटकों पर है। केरल की प्राकृतिक खूबसूरती, हरे-भरे पहाड़, शांत बैकवाटर, समुद्र तट, वन्यजीव अभयारण्य और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को पर्यटकों तक पहुंचाने के उद्देश्य से जयपुर में रोड शो आयोजित किया गया। होटल रमाडा में हुए इस कार्यक्रम में केरल के लोक कलाकारों ने पारंपरिक प्रस्तुतियों के माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक विविधता की झलक दिखाई। कार्यक्रम में केरल टूरिज्म के एडीजी सुमित कुमार ठाकुर मौजूद रहे। उन्होंने पर्यटन क्षेत्र में हो रहे बदलावों, नए पर्यटन अनुभवों और राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। देश के प्रमुख शहरों में ट्रैवल ट्रेड मीट और रोड शो केरल टूरिज्म की ओर से त्योहारी सीजन से पहले देश के प्रमुख शहरों में ट्रैवल ट्रेड मीट और रोड शो आयोजित किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों के ट्रैवल एजेंटों और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों के साथ साझेदारी मजबूत करना है, ताकि पर्यटकों को केरल घूमने के लिए आकर्षक पैकेज उपलब्ध कराए जा सकें। जयपुर में आयोजित कार्यक्रम में भी स्थानीय ट्रैवल ट्रेड से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ संवाद और पर्यटन संभावनाओं पर चर्चा की गई। छह रात और सात दिन के पैकेज में समुद्र तट से पहाड़ों तक का अनुभव केरल टूरिज्म इस त्योहारी सीजन में यात्रियों को छह रात और सात दिन के हॉलिडे पैकेज के जरिए राज्य के अलग-अलग पर्यटन स्थलों का अनुभव देने पर जोर दे रहा है। इन यात्राओं में समुद्र तटों, बैकवाटर, हिल स्टेशन, जंगलों और प्राकृतिक दृश्यों को शामिल किया जा सकता है। परिवारों, दोस्तों के समूहों और प्रकृति प्रेमियों के लिए केरल में अलग-अलग तरह के पर्यटन अनुभव मौजूद हैं। राजस्थान के पर्यटकों के लिए केरल की खासियत यह है कि यहां प्राकृतिक सुंदरता के साथ संस्कृति, विरासत, मंदिरों, स्थानीय खान-पान और ग्रामीण जीवन को करीब से देखने का अवसर भी मिलता है। पर्यटक समुद्र तटों पर सुकून भरे पल बिताने के साथ हरे-भरे पहाड़ी इलाकों की सैर, हाउसबोट में बैकवाटर का अनुभव और स्थानीय व्यंजनों का स्वाद ले सकते हैं। लोक कलाओं के जरिए पेश की केरल की सांस्कृतिक विरासत जयपुर में हुए रोड शो का एक प्रमुख आकर्षण केरल के लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां रहीं। कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा, विशिष्ट रंग-सज्जा और नृत्य शैलियों के माध्यम से केरल की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाया। इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों को राज्य की लोक परंपराओं और धार्मिक-सांस्कृतिक अनुष्ठानों से परिचित कराया। केरल की सांस्कृतिक पहचान में तेय्यम, कथकली, ओट्टन थुल्लल और मोहिनीअट्टम जैसी कलाओं का विशेष स्थान है। तेय्यम उत्तरी केरल के मालाबार क्षेत्र की प्रसिद्ध अनुष्ठानिक कला है, जिसमें कलाकार आकर्षक मुख-सज्जा, विशाल मुकुट और पारंपरिक वेशभूषा धारण करते हैं। कथकली अपने विस्तृत मेकअप, रंग-बिरंगे परिधानों और भाव-भंगिमाओं के जरिए पौराणिक कथाओं को मंच पर प्रस्तुत करने के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। वहीं, मोहिनीअट्टम अपनी कोमल और लयात्मक नृत्य शैली के लिए जाना जाता है। ओट्टन थुल्लल में नृत्य, अभिनय, हास्य और व्यंग्य के माध्यम से सामाजिक विषयों को प्रस्तुत किया जाता है। इन कलाओं के जरिए केरल अपनी सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन से जोड़ने का प्रयास कर रहा है। पहली तिमाही में घरेलू पर्यटकों की संख्या में 10.98 प्रतिशत वृद्धि केरल टूरिज्म के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 की पहली तिमाही में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में घरेलू पर्यटकों के आगमन में 10.98 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। पर्यटन विभाग अब सितंबर से नवंबर के बीच दशहरा और दीपावली की छुट्टियों को ध्यान में रखते हुए घरेलू पर्यटकों की संख्या बढ़ाने पर फोकस कर रहा है। इसके लिए गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली और राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों में बीटूबी पार्टनरशिप मीट और रोड शो आयोजित किए जा रहे हैं। राजस्थान में आयोजित बैठक में केरल के करीब 45 पर्यटन हितधारकों ने हिस्सा लिया और स्थानीय ट्रैवल ट्रेड प्रतिनिधियों के साथ पर्यटन उत्पादों तथा हॉलिडे पैकेज की जानकारी साझा की। अभियान के तहत अहमदाबाद, वडोदरा, मुंबई, पुणे, दिल्ली और जयपुर में गतिविधियां आयोजित की गई हैं। नवंबर में सूरत और नागपुर में भी बीटूबी मीट आयोजित करने की योजना है। ‘ब्रांड वायनाड’ के जरिए ग्रामीण जीवन और प्रकृति को पर्यटन से जोड़ने की पहल सुमित कुमार ठाकुर ने बताया कि केरल टूरिज्म ने 6 अक्टूबर को वायनाड के वैथिरी में ‘ब्रांड वायनाड’ पहल की शुरुआत की। इसका उद्देश्य वायनाड की प्राकृतिक सुंदरता, कृषि, विरासत और सांस्कृतिक परंपराओं को देश-विदेश के पर्यटकों तक पहुंचाना है। इस पहल के अंतर्गत जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देने, होमस्टे सुविधाओं को बेहतर बनाने और स्थानीय समुदायों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इस दौरान रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म मिशन के नए ‘लाइफ एक्सपीरियंस ट्रेल्स’ और एक गाइडेड ट्रैवल कार्यक्रम की भी शुरुआत की गई। इसमें थिरुनेल्ली सर्किट, चेकाडी फार्म का दौरा और कॉफी से जुड़े अनुभव शामिल हैं। पर्यटक स्थानीय कृषि जीवन, कॉफी और मसालों की खेती, पारंपरिक चावल की किस्मों, शहद और क्षेत्रीय खान-पान को करीब से जान सकेंगे। वायनाड की जनजातीय विरासत को पर्यटन से जोड़ने के लिए ‘एन ऊरू’ हेरिटेज विलेज के विस्तार की योजना भी सामने रखी गई है।