कैलादेवी अभयारण्य के लखरूकी स्थित सॉफ्ट एनक्लोजर में रह रहे बाघ RBT-2509 को अब खुले जंगल में नहीं छोड़ा जाएगा। वन विभाग ने उसे कोटा के अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क की रेस्क्यू सुविधा में शिफ्ट करने की अनुमति दी है। मानव-वन्यजीव संघर्ष की 2 घटनाओं के बाद एक कमेटी ने उसे जंगल में दोबारा नहीं छोड़ने की सिफारिश की थी। बाघ को जून 2025 में रणथम्भौर से लखरूकी लाया गया था। शिफ्टिंग के दौरान उसे ट्रैंक्यूलाइज कर वन्यजीव प्रोटोकॉल के तहत अभेड़ा ले जाया जाएगा। उसका सार्वजनिक प्रदर्शन नहीं होगा। लखरूकी एनक्लोजर में चीतल लाने की योजना बाघ के कारण रुकी थी। अब बाघ के शिफ्ट होने से यह योजना आगे बढ़ सकेगी। उप वन संरक्षक संजीव शर्मा ने बताया कि शिफ्टिंग के आदेश जारी हो चुके हैं। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की टीम आने के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी होगी।