कोटा के मोखा पाड़ा स्थित पशु हॉस्पिटल से तीन दिन से मरे हुए 4 पशुओं को नहीं उठाया गया। हॉस्पिटल परिसर में पड़े मृत पशुओं से बदबू फैल रही है। स्टाफ को बैठने में परेशानी हो रही है और काम भी प्रभावित हो रहा है। मृत पशुओं के नहीं उठाने से बदबू के साथ संक्रमण का भी खतरा है। हॉस्पिटल के डॉक्टर, स्टाफ और पशुपालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हॉस्पिटल में रोजाना पशुपालक अपने बीमार मवेशियों को इलाज के लिए लेकर पहुंचते हैं। परिसर में फैली बदबू के चलते वहां रुकना तक मुश्किल हो गया है। बदबू आने पर भी स्टाफ को काम करना पड़ रहा हॉस्पिटल के प्रभारी डॉक्टर दिनेश गोठवाल का कहना है पिछले तीन दिन से मवेशियों को नहीं उठाया जा रहा है। हमने अपने स्तर पर भी कोशिश की। लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। हॉस्पिटल में 17 का स्टाफ है। इनमें डॉक्टर, नर्सिंग ऑफिसर व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। वैसे तो ऐसी परिस्थितियों में काम करने की हमारी आदत हो गई। मृत पशुओं से अमोनिया गैस निकलती है, जो हानिकारक शव को पड़े ज्यादा दिन हो जाने पर बदबू इतनी तेज हो जाती, अस्पताल में काम करना मुश्किल होता जाता है। मृत मवेशियों से निकलने वाली दुर्गंध में अमोनिया और दुर्गंध की गैस होती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं। संक्रमण फैलने का खतरा साथ ही साथ दूसरे पशुओं में संक्रमण फैलने की आशंका भी बनी रहती है। मृत पशुओं के लंबे समय तक पड़े रहने से बैक्टीरिया और कीटाणुओं के पनपने का खतरा बढ़ जाता है। इससे न सिर्फ अस्पताल परिसर अस्वच्छ हो रहा है, बल्कि अन्य बीमार पशुओं में संक्रमण फैलने की आशंका भी बनी हुई है।