कोटा शहर में गणेशोत्सव पर धार्मिक उत्साह के साथ-साथ पर्यावरणीय चेतना की अनोखी झलक देखने को मिल रही है। शहर की विभिन्न समितियों की ओर से इको-फ्रेंडली प्रतिमाओं की स्थापना की गई है और पर्यावरण संरक्षण और एकजुटता का संदेश दिया जा रहा है। कोटा में अलग-अलग पांडालों में अलग-अलग थीम पर गणेश प्रतिमाएं स्थापित हैं। कहीं धनिए से गणेशजी बनाए गए हैं तो कहीं नारियल के रेशे से गणेश प्रतिमा तैयार की गई है। 21 किलो साबुत धनिया से तैयार हुए गणपति कोटा के अमर निवास में अमर निवास सेवा मंडल की ओर से साल 2004 से लगातार इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं की स्थापना की जा रही हैं। इस साल अमर निवास के महाराजा की भव्य प्रतिमा को 21 किलो साबुत धनिया से तैयार किया गया है। मंडल के सदस्य आशीष शर्मा ने बताया कि हमारी प्राथमिकता हमेशा से पर्यावरण-अनुकूल प्रतिमाएं स्थापित करने की रही है। विसर्जन के समय यह प्रतिमा पानी में पूरी तरह घुल जाती है, जिससे जलीय जीवों और मछलियों को आहार प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि इस बार पहली बार 108 भक्त एक साथ बैठकर सामूहिक रूप से गणेश चालीसा का पाठ करेंगे। इसके अलावा 56 भोग, भव्य महाआरती, सुंदरकांड पाठ और प्रसादी वितरण का आयोजन भी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मंडल की परंपरा रही है कि हर बार किसी विशेष और अलग तरीके से प्रतिमा तैयार की जाती है, ताकि श्रद्धालु प्रकृति और संस्कृति से जुड़ सकें। 10 फीट के मूषक पर सवार गणेश तिरंगा चौराहा पर मित्र मंडल की ओर से पिछले 10 सालों से मिटटी के इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा स्थापित की जा रही है। इस बार यहां भगवान गणेश अपने वाहन मूषक (चूहे) की सवारी करते हुए नजर आ रहे हैं। आयोजक नागेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि हम पिछले कई वर्षों से यहाँ प्रतिमा स्थापित कर रहे हैं। पिछले साल में हमने शेर के सिंहासन और खड़े स्वरूप में प्रतिमाएं बनाई थीं। इस बार कुछ नया करने के उद्देश्य से 8 फीट ऊंचे और 10 फीट लंबे मूषक बनाए गए हैं, जिस पर भगवान गणेश विराजमान हैं। कुल मिलाकर इस प्रतिमा की ऊंचाई लगभग 16 फीट है। 240 किलो मिट्टी व चंदन से बनी गणेश प्रतिमा सर्व हिंदू समाज सोशल क्रांतिकारी महासंघ की ओर से 240 किलो शुद्ध मिट्टी से निर्मित 7 फीट ऊंची इको फ्रेंडली संत स्वरूप चंदन गणेश की भव्य प्रतिमा की स्थापना की गई है। गुरु धाम कॉलोनी में पंडाल में प्रतिमा स्थापित है। इस प्रतिमा पर 15 किलो औषधीय चंदन पाउडर का विशेष लेप किया गया है। प्रतिमा का दिव्य श्रृंगार पूरी तरह प्राकृतिक घटकों केसर, कुमकुम, हल्दी, चूने तथा 1200 रुद्राक्ष की मालाओं से किया गया है। विसर्जन के समय यह चंदन जल में घुलकर जलीय जीवों के लिए औषधीय वरदान साबित होगा। नारियल के रेशे से बनी 3 फीट ऊंची इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा कर्मयोगी सेवा संस्थान की ओर से गुरुधाम मुख्यालय पर 12 किलो नारियल के रेशे से निर्मित तीन फीट ऊंची इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा स्थापित की गई है। संस्थान की ओर से 2021 से लगातार इसी प्रतिमा को स्थापित कर गणेशोत्सव मनाया जा रहा है। इको-फ्रेंडली प्रतिमा अनंत चतुर्दशी महोत्सव शोभायात्रा में जन-जागरण और पर्यावरण चेतना का संदेश देते हुए शामिल की जाएगी। परंपरा और प्राकृतिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए, प्रतिमा का पारंपरिक रूप से विसर्जन स्थल बारहद्वारी पर केवल जल स्नान कराया जाएगा। इसके बाद प्रतिमा को संस्थान के कार्यालय में लाकर सम्मानपूर्वक स्थापित किया जाएगा।