कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज में सिजेरियन डिलीवरी के बाद दो महिलाओं की किडनी फंक्शन बंद हो गए। बुधवार (14 अक्टूबर) को ऑपरेशन के कुछ घंटे बाद ही दोनों के यूरिन आउटपुट में दिक्कत आने लगी। रेशमा (40) की हालत गंभीर है। परिजन उसे निजी अस्पताल ले गए, जहां वह आईसीयू में भर्ती है। दूसरी प्रसूता अनिता (30) को गुरुवार को मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के आईसीयू में शिफ्ट किया। महिला अनीता के रिश्तेदार श्याम लाल ने बताया कि अनीता को 13 अक्टूबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 14 अक्टूबर को सुबह 11 बजे अनीता का सिजेरियन के जरिए प्रसव कराया गया था। 15 अक्टूबर तड़के करीब 5 बजे अचानक उसे सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगी और यूरिन बनना बंद हो गया। कुछ देर बाद महिला की प्लेटलेट्स तेजी से गिरने लगी, जिसके लिए डॉक्टरों ने तत्काल सिंगल डोनर प्लेटलेट्स चढ़ाने की सलाह दी। मरीज के परिजनों को प्लेटलेट्स की व्यवस्था के लिए एमबीएस अस्पताल स्थित ब्लड बैंक भागना पड़ा। प्लेटलेट्स नहीं मिली इधर, मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल से एमबीएस अस्पताल आने-जाने में मरीज के परिजनों को समय भी लगा। क्योंकि मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में प्लेटलेटस ही नहीं मिल सकी। यहां मशीन खराब होने के चलते प्लेटलेटस नहीं मिले पाए। इधर, मरीज की स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। बाद में महिला की हालत को देखते हुए सुपर स्पेशियलिटी के नेफ्रोलॉजी विभाग में शिफ्ट किया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है। डिलीवरी के बाद बिगड़ी तबीयत जानकारी के अनुसार (मीनार मस्जिद के पास) निवासी रेशमा (40) पत्नी मसूद खान और निमोदा हरजी गांव निवासी अनिता (30) पत्नी हंसराज बैरवा का बुधवार को गायनी विभाग में सीजेरियन डिलीवरी हुई थी। शुरुआती कुछ घंटों स्थिति सामान्य रही, लेकिन इसके बाद अचानक दोनों का यूरिन आउटपुट रुकने लगा। रेशमा की हालत बिगड़ती देख परिजन उसे तुरंत निजी अस्पताल ले गए। वहीं, अनिता को मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के आईसीयू में शिफ्ट किया गया है। गलत दवा (ड्रिप) चढ़ाने से बिगड़ी तबीयत अनीता के पति हंसराज ने बताया कि डिलीवरी के बाद जब पत्नी की तबीयत बिगड़ने लगी तो नर्स आपस में बात कर रही थी कि यह बोतल क्यों चढ़ाई। इस बात को लेकर वे आपस में ही झगड़ने लगी। घर वालों ने आरोप लगाया कि गलत ट्रिप चढ़ाने की वजह से उसकी तबीयत बिगड़ी है। पहले 5 प्रसूताओं की हो गई थी मौत इससे पहले 5 मई 2026 को सीजेरियन के बाद 12 प्रसूताओं की किडनी फेल हो गई थी। जिसके बाद पायल, ज्योति, पिंकी, प्रिया और शिरीन की मौत हो गई थी। रागिनी, धन्नी, सुशीला, चंद्रकला, किरण, पिंकी और आरती को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई थी। यूरिन आना बंद नहीं हुआ इधर हॉस्पिटल अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा ने बताया कि एक प्रसूता को सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में शिफ्ट किया गया है। उन्होंने कहा कि यूरिन आना पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन कुछ परेशानी है। ----------------- ये खबर भी पढ़िए… कोटा में निलंबित 3 डॉक्टर 5 महीने बाद बहाल:4 जांच कमेटियों ने किसी को नहीं माना दोषी; 13 दिन में 5 प्रसूताओं की हुई थी मौत कोटा मेडिकल कॉलेज से जुड़े हॉस्पिटल में प्रसूताऑ की मौत व किडनी फेल्योर के करीब 5 महीने पुराने मामले में निलंबित तीन डॉक्टरों को राहत मिली है। मामले में जांच कमेटियों ने डॉक्टर्स की लापरवाही नहीं माना है। (पढ़िए पूरी खबर)