कोटा में मौसम के मिजाज में आ रहे बदलाव और दिन-रात के तापमान में उतार-चढ़ाव का सीधा असर अब लोगों की सेहत पर दिखने लगा है। मौसम के बदलाव के चलते शहर के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल की ओपीडी में मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अस्पताल में जहां आमतौर पर ओपीडी दो से ढाई हजार रहती है, वह बढ़कर तीन हजार से ज्यादा पहुंच चुकी है। एमबीएस अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राकेश ने बताया कि मौसम बदलते ही बीमारियों का खतरा जरूर बढ़ता है, लेकिन थोड़ी सतर्कता बरती जाए तो बीमारियों से बचा जा सकता है। अधीक्षक ने बताया कि मौसम में बदलाव के दौर में जरा सी लापरवाही बीमारियों की वजह बन जाती है। अस्पताल में दवाओं और जांचों के पुख्ता इंतजाम है। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अस्पताल में व्यवस्थाएं चाक-चौबंद कर ली हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल में आवश्यकतानुसार सभी प्रकार की दवाइयां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। पैथोलॉजी लैब को निर्देश जारी किए गए हैं कि मरीजों के सैंपल आते ही उनकी जांचें जल्द से जल्द की जाएं, ताकि समय पर इलाज शुरू हो सके। खान-पान में बरतें सावधानी अधीक्षक के अनुसार, मानसून के दौरान जहां पेट से जुड़ी समस्याएं अधिक थीं, वहीं अब सर्दी की आहट के साथ ही गले में खराश, जुकाम और बुखार जैसी शिकायतें बढ़ रही हैं। उन्होंने आमजन से अपील की है कि वे ठंडी और बासी चीजों के सेवन से बचें तथा मौसम के अनुकूल ही खान-पान रखें। उन्होंने बताया कि अभी मौसम में बदलाव के चलते सर्दी जुकाम, वायरल, खांसी, हाथ पैर में दर्द की शिकायतों के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। सोशल मीडिया देखकर खुद न करें इलाज, शरीर से न खिलवाड़ बिना डॉक्टरी सलाह के दवाइयां लेने की बढ़ती प्रवृत्ति पर उन्होंने कहा कि सामान्य बुखार, खांसी में भी लोग अपनी मर्जी से दवा ले लेते हैं। आजकल गूगल, यूट्यूब या सोशल मीडिया पर देखकर खुद का इलाज करने का चलन काफी बढ़ गया है। किसी भी दवा के साइड इफेक्ट्स और उसके दूरगामी नतीजों की समझ केवल एक डॉक्टर को ही होती है, जो उसने सालों की पढ़ाई से हासिल की है। इंटरनेट से देखकर खुद का डॉक्टर बनना सेहत के साथ खिलवाड़ है। हमेशा डॉक्टरी परामर्श के बाद ही दवा लें।