कोटा में शनिवार को साल की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित की गई। इस दौरान आपसी समझाइश और राजीनामे के जरिए कुल 2 लाख 19 हजार 262 मामलों का निस्तारण किया गया। पति-पत्नी के बीच राजीनामा करवाया गया। मोटर दुर्घटना के मामलों में कुल 1 करोड़ 72 लाख 43 हजार रुपए के मुआवजे पर समझौता हुआ। सड़क दुर्घटना के मामले में एक घायल व्यक्ति को 20 लाख रुपए का मुआवजा देने पर सहमति बनी। जिला मुख्यालय के साथ रामगंजमंडी, दीगोद, इटावा, कनवास और सांगोद में लोक अदालत लगाई गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष हेमराज गौड़ ने बताया- लोक अदालत में लंबित मामलों और प्री-लिटिगेशन सहित कुल 3 लाख 71 हजार 879 मामले सुनवाई के लिए रखे गए थे। इनमें 66,635 न्यायालयों में लंबित मामले और 3 लाख 5 हजार 244 प्री-लिटिगेशन मामले शामिल थे। जिला मुख्यालय पर 11 बेंचों का गठन किया गया, जबकि तालुका स्तर पर 6 बेंचों के माध्यम से मामलों की सुनवाई हुई। बैंक लोन, परिवार विवाद और बिजली-पानी के बिल के विवाद भी सुझाए निस्तारित मामलों में 59,750 न्यायालयों में लंबित प्रकरण और राजस्व मामलों सहित 1 लाख 59 हजार 512 प्री-लिटिगेशन प्रकरण शामिल हैं। इनमें चेक अनादरण, बैंक ऋण वसूली, मोटर दुर्घटना दावा, पारिवारिक विवाद, श्रम विवाद, बिजली-पानी के बिल, बीएसएनएल बकाया, भूमि अधिग्रहण और राजस्व विवाद जैसे मामले शामिल रहे। मोटर दुर्घटना के मामलों में 2.92 करोड़ रुपए का समझौता राष्ट्रीय लोक अदालत में मोटर दुर्घटना से संबंधित 95 मामले राजीनामे के लिए रखे गए। इनमें से 43 मामलों का निस्तारण करते हुए पीड़ितों और आवेदकों को कुल 1 करोड़ 19 लाख 75 हजार रुपए दिलवाने पर सहमति बनी। इनमें सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को 2 लाख 25 हजार रुपए और दुर्घटना में मृत व्यक्ति के आश्रितों को 12 लाख 50 हजार रुपए का मुआवजा दिलाने के लिए समझौता हुआ। वहीं, मोटर दुर्घटना के 73 मामलों में से 22 का निस्तारण किया गया। इन मामलों में कुल 1 करोड़ 72 लाख 43 हजार रुपए के मुआवजे पर समझौता हुआ। एक अन्य मामले में सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को 20 लाख रुपए का मुआवजा देने पर सहमति बनी। लोक अदालत की सफलता के लिए न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और बेंच सदस्यों ने डेढ़ महीने से प्रयास किए। प्री-काउंसलिंग और आपसी समझाइश के जरिए पक्षकारों को विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान करने के लिए प्रेरित किया गया।