श्री स्थानकवासी जैन वीर संघ में पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के तहत धर्मसभा को संबोधित करते हुए संघ नायक गुरुदेव मुनिजी महाराज ने कहा कि वे आत्माएं धन्य हैं, जो संसार के बंधनों को छोड़कर योग व साधना के मार्ग पर आगे बढ़ती हैं। उन्होंने कहा कि ‘रहणो नहीं, चालणो है’ सूत्र सुनकर एक बादशाह के जीवन में बड़ा बदलाव आया था। हमें भी विचार करना चाहिए कि जब एक दिन संसार छोड़ना तय है तो जीवन में बदलाव कब आएगा। उन्होंने बताया कि अंतगडदशा सूत्र में वर्णित 90 महान आत्माओं ने प्रभु वाणी सुनकर जीवन बदला और मोक्ष प्राप्त किया। धन के साथ तीन दोष जुड़े हैं। मृत्यु के बाद धन साथ नहीं जाता, जीवन में कब तक साथ रहेगा इसकी गारंटी नहीं और धन होने के बावजूद शांति मिले, यह जरूरी नहीं। इसलिए धन की आसक्ति छोड़नी चाहिए। व्यक्ति चाहे तो हैवान बन सकता है और चाहे तो भगवान। धन, यौवन व सत्ता के मोह में विवेक खोने से व्यक्ति लक्ष्य से भटक जाता है।पर्युषण पर्व के दौरान तप साधक कठिन तपस्या कर रहे हैं।