जिले में पशु चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह से ठप होने की कगार पर पहुंच गई है। पशुपालन विभाग द्वारा आवश्यक अस्थायी आधार भर्ती 2025 के तहत कार्यरत पशुधन निरीक्षकों की वित्तीय स्वीकृति 30 सितंबर को समाप्त होने के बाद सेवाएं लेना बंद कर दिया गया है। इस फैसले से अकेले बाड़मेर जिले के 249 पशु अस्पतालों और उप-केंद्रों पर ताले लटक गए हैं। बाड़मेर में पहले से ही 179 पशु चिकित्सा केंद्र स्थायी स्टाफ के अभाव में खाली चल रहे थे। अब 70 यूटीबी कर्मियों की सेवाएं समाप्त होते ही वे अस्पताल भी बंद हो गए हैं। 16 महीने तक अस्पतालों में दी थी सेवाएं , अब गेट पर फिर लटके ताले जिले के दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले 16 महीनों से ये 70 पशुधन निरीक्षक दिन-रात सेवाएं दे रहे थे। इनके कारण कई बंद पड़े केंद्र फिर से जीवित हुए थे और ग्रामीणों को अपने ही गांव में पशुओं के इलाज की सुविधा मिल रही थी। लेकिन 30 सितंबर को वित्तीय स्वीकृति की समयावधि खत्म होते ही विभाग ने सेवाएं लेना बंद कर दिया, जिससे इन अस्पतालों पर फिर से ताले लटक गए हैं। बाड़मेर और बालोतरा जिलों के 70 यूटीबी का ठेका 30 सितंबर को पूरा हो गया। लेकिन सरकार द्वारा इनका ठेका रिन्यू नहीं किया गया। जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में यूटीबी के अभाव में पशु चिकित्सालय और उप केंद्र बंद पड़े हैं। - प्रकाश चौधरी, यूटीबी, पशु चिकित्सा लंगेरा। बाड़मेर और बालोतरा दोनों जिलों को मिलाकर 70 यूटीबी लगाए गए थे। जिनका कॉन्टैक्ट 30 सितंबर तक पूरा हो गया है। इन कॉन्टैक्ट रिन्यू नहीं हुआ है जिसके कारण ऊपर से आदेश है कि इनसे कोई भी काम नहीं लिया जाए। - राजेश कुमार, ज्वाइंट डायरेक्टर, पशुपालन विभाग