भास्कर न्यूज | प्रतापगढ़ मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत कोतवाली पुलिस ने डिजिटल माध्यम से एमडी की खरीद-फरोख्त करने वाले एक तस्कर को गिरफ्तार किया है। पकड़ा गया आरोपी अपने मोबाइल में अवैध एमडी का वीडियो बनाकर रखता था और ग्राहकों को यह सैंपल दिखाकर व्यावसायिक मात्रा में सौदे तय करता था। सोहनपुर फंटे पर नाकाबंदी के दौरान संदिग्ध अवस्था में पैदल आ रहे इस आरोपी को रोककर तलाशी ली गई, तो उसके मोबाइल की गैलरी से एमडी का वीडियो बरामद हुआ। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी ने यह वीडियो एमडी के खरीदार को भेजा था, इसने ऑनलाइन यूपीआई माध्यम से एडवांस राशि भी ट्रांसफर कर दी थी। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उसका मोबाइल जब्त कर लिया है। नाकाबंदी के दौरान संदिग्ध की तलाशी में खुला खेल : सोहनपुर फंटे पर पुलिस की टीम नाकाबंदी कर वाहनों और संदिग्धों की जांच कर रही थी। इसी दौरान अखेपुर गांव की तरफ से एक व्यक्ति पैदल आता हुआ दिखाई दिया। पुलिस को देखकर उसकी गतिविधियां संदिग्ध लगीं, इस पर उसे रोककर पूछताछ की गई। आरोपी ने अपना नाम वीरेंद्र लबाना निवासी अखेपुर, थाना प्रतापगढ़ बताया। पुलिस ने जब उसकी नियमानुसार तलाशी ली, तो उसके पास से एक मोबाइल फोन बरामद हुआ। मोबाइल फोन की जांच करने पर गैलरी में अवैध मादक पदार्थ एमडी का एक वीडियो सेव किया हुआ मिला। ऑनलाइन पेमेंट और सैंपल का तरीका: मोबाइल में वीडियो मिलने पर जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की, तो आरोपी वीरेंद्र ने तस्करी के इस नए तरीके का खुलासा किया। उसने बताया कि वह एमडी ड्रग्स का वीडियो बनाकर खरीदारों को भेजता था, ताकि उन्हें सैंपल देखने के लिए बार-बार आने की जरूरत न पड़े। खरीदार जब वीडियो देखकर एमडी की क्वालिटी पसंद कर लेते थे, तो वे ऑनलाइन फोन-पे के जरिए पैसे भेज देते थे। सौदा तय होने के बाद ही व्यावसायिक मात्रा में एमडी की डिलीवरी की जाती थी। आरोपी के खाते में ऑनलाइन पेमेंट के सबूत भी मिले हैं। पुलिस अब इस मामले से जुड़े अन्य तस्करों और नेटवर्क की पड़ताल में जुटी है। भास्कर नॉलेज : डिजिटल ड्रग स्मगलिंग का नया ट्रेंड : पारंपरिक तस्करी में तस्करों को सैंपल दिखाने के लिए मादक पदार्थ भौतिक रूप से साथ रखना पड़ता था, इसमें पुलिस चेकिंग के दौरान पकड़े जाने का खतरा सबसे ज्यादा रहता था। पुलिस से बचने के लिए तस्करों ने अब डिजिटल तरीका अपना लिया है। एमडी या अन्य ड्रग्स का हाई-क्वालिटी वीडियो बनाकर एनक्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स या सोशल मीडिया के जरिए ग्राहकों को भेजा जाता है। पेमेंट भी यूपीआई या वॉलेट के माध्यम से ली जाती है, ताकि कैश का लेनदेन न हो। डिलीवरी के समय ही माल निकाला जाता है, इससे रास्ते में जब्ती का जोखिम कम से कम हो सके।