नगरीय निकाय चुनावों के बाद अब ग्रामीण सरकार चुनने के सबसे बड़े सियासी दंगल पंचायत चुनाव का बिगुल बज चुका है। चुनाव का दायरा कितना व्यापक और प्रशासनिक रूप से चुनौतीपूर्ण है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जहां हालिया नगरीय निकाय चुनाव महज 10245 पदों पर सिमटा था, वहीं पंचायत चुनाव में 1.55 लाख से अधिक पदों पर उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला होना है। यानी सीधा 15 गुना बड़ा मुकाबला है। चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग एक्शन मोड में है। इसी कड़ी में शनिवार को राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने सचिवालय में वीसी के जरिए सभी संभागीय आयुक्तों और जिला निर्वाचन अधिकारियों (कलेक्टरों) की मैराथन बैठकें ली। आयुक्त ने दो टूक शब्दों में निर्देश दिए कि प्रशासनिक अमला किसी भी स्तर पर ढिलाई न बरते और अतिरिक्त सतर्कता के साथ मैदान में उतरे। बिजली, संवेदनशील बूथ, ट्रैनिंग आदि में किसी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं होगी। भास्कर इनसाइट - आयोग की 4 बड़ी हिदायतें 1. 15 गुना बड़ा दायरा: नगरीय चुनाव की सफलता के बाद अब ग्रामीण स्तर पर इससे कहीं अधिक बड़ी प्रशासनिक चुनौती है। हर जिले में समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर उसकी नियमित मॉनिटरिंग की जाए, ताकि प्रक्रिया में कोई तकनीकी या प्रशासनिक चूक न हो। 2. मतदान केंद्रों पर नो-ब्लैक आउट जोन: प्रत्येक ग्राम पंचायत में आवश्यकतानुसार जनरेटर और लाइटिंग की पुख्ता व्यवस्था हो, ताकि निर्वाचन कार्यों और मतदान के दौरान बिजली गुल होने से कामकाज प्रभावित न हो। इसके लिए बिजली कंपनियों से अग्रिम समन्वय करने को कहा गया है। 3. संवेदनशील बूथों पर कड़ी नजर और ज्वाइंट एक्शन: कानून-व्यवस्था को लेकर पुलिस और जिला प्रशासन को संयुक्त रूप से काम करने के निर्देश दिए गए हैं। क्रिटिकल और संवेदनशील मतदान केंद्रों की एडवांस मैपिंग कर वहां पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात करने, भौतिक सत्यापन करने और कमियों को तुरंत दूर करने पर जोर दिया गया है। 4. ट्रेनिंग, लॉजिस्टिक्स और आदर्श आचार संहिता: मतदान दलों के गठन, उनके दो-स्तरीय प्रशिक्षण, ईवीएम-मतपेटियों की उपलब्धता, मतपत्रों की सुरक्षा और परिवहन प्रबंधन की समीक्षा की गई। साथ ही दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुगम मतदान के इंतजाम करने और आदर्श आचार संहिता की सख्ती से पालना सुनिश्चित करने को कहा गया है।