मेहंदीपुर बालाजी मंदिर ट्रस्ट की ओर से संचालित रामेष्ट-वेद-संस्कृत-गुरुकुलम् के बटुकों का उपनयन एवं उपाकर्म संस्कार 15 सितंबर को उत्तराखंड के ऋषिकेश में होगा। सिद्धपीठ के महंत डॉ. नरेशपुरी महाराज के सान्निध्य में होने वाले इस कार्यक्रम में कई प्रमुख संत भी शामिल होंगे। गुरुकुल के प्राचार्य घनश्याम हरदेनिया ने बताया कि सत्र 2026-27 में अध्ययनरत नए बटुकों का उपनयन संस्कार और अन्य सभी बटुकों का उपाकर्म संस्कार वेद-निकेतन स्वर्गाश्रम, जानकी झूले के पास, ऋषिकेश में होगा। यह आयोजन वैदिक विधि-विधान और आचार्यों के मार्गदर्शन में संपन्न कराया जाएगा। उपनयन संस्कार के माध्यम से नए बटुकों को गुरु-शिष्य परंपरा, वैदिक अध्ययन, अनुशासन और संस्कारमय जीवन के लिए प्रेरित किया जाएगा। वहीं, सभी बटुकों का उपाकर्म संस्कार वेदाध्ययन और ऋषि परंपरा के प्रति श्रद्धा व संकल्प को मजबूत करेगा। आचार्य घनश्याम ने बताया कि गुरुकुल का उद्देश्य वेद, संस्कृत और भारतीय संस्कृति के साथ विद्यार्थियों में संस्कार, चरित्र और राष्ट्रबोध का विकास करना है। इस अवसर पर गुरुकुल परिवार के साथ अभिभावक और संस्कृति-प्रेमी भी शामिल होंगे।