अमेरिका में बच्चों व टीनेजर्स रात के समय फेसबुक और इंस्ट्राग्राम का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। उनके लिए रोजाना एप चलाने की डेली लिमिट भी लागू होगी। यह बदलाव 26 अगस्त को अमेरिका में मेटा और 29 राज्यों के बीच हुए 16.7 बिलियन डॉलर यानी करीब 1.59 लाख करोड़ रुपए के एक बड़े कानूनी समझौते के बाद लागू किए जा रहे हैं। यह नियम अभी पूरी दुनिया में नहीं केवल अमेरिका में लागू होंगे। मेटा पर आरोप था कि फेसबुक और इंस्टाग्राम से बच्चों और टीनेजर्स के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है और कंपनी ने इस नुकसान को लोगों से छुपाया। मेटा पर बच्चों का पर्सनल डेटा जुटाकर AI मॉडल्स को ट्रेन करने का आरोप भी है। मेटा को 4 बड़े बदलाव करने होंगे फेसबुक-इंस्टाग्राम मानसिक स्वास्थ्य पर 5 तरीकों से नुकसान पहुंचा रहा था अब इस मामले से जुड़ी 3 जरूरी सवालों के जवाब… सवाल 1: अगर मेटा समझौता नहीं करती तो उस पर कितना जुर्माना लगता? जवाब: अगर मेटा यह मुकदमा कोर्ट में हार जाती, तो अमेरिकी राज्यों की मांग के मुताबिक उस पर करीब 200 बिलियन डॉलर यानी करीब 19 लाख करोड़ रुपए तक का जुर्माना लग सकता था। वहीं कानून की सबसे सख्त धाराओं के तहत यह आंकड़ा 1.4 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 133 लाख करोड़ रुपए तक भी पहुंच सकता था। लेकिन कोर्ट में वकीलों को भी पता होता है कि जज कभी किसी कंपनी पर ऐसा काल्पनिक जुर्माना नहीं लगाते। इस वजह से राज्यों के वकीलों ने कोर्ट के सामने कंपनी की कमाई और नुकसान के व्यावहारिक आकलन के आधार पर 200 बिलियन डॉलर जुर्माने की वास्तविक मांग रखी थी। बाद में 17 बिलियन डॉलर में समझौता कर लिया। सवाल 2: क्या पहले भी मेटा पर इस तरह के जुर्माने लगे हैं? जवाब: हां, मेटा पर पहले भी कई मामले दर्ज हुए हैं। पिछले महीने न्यू मेक्सिको के अटॉर्नी जनरल के दर्ज केस में मेटा को टीनेजर्स की मेंटल हेल्थ के लिए 567 मिलियन डॉलर यीनी करीब ₹5.4 हजार करोड़ देने का आदेश दिया था। सवाल 3: इस फैसले का भारतीय सोशल मीडिया यूज़र्स पर क्या असर पड़ेगा? जवाब: हालांकि यह फैसला अमेरिकी अदालत और वहां के राज्यों के लिए है, लेकिन मेटा अक्सर वैश्विक स्तर पर अपने सेफ्टी फीचर्स लागू करता है। 1-घंटे की टाइम लिमिट, नाइट मोड और सख्त एज वेरिफिकेशन फीचर्स आने वाले समय में भारत समेत दुनियाभर के टीनेजर्स और उनके पेरेंट्स के लिए भी रोलआउट किए जा सकते हैं। मेटा बोला- सोशल मीडिया की लत कोई बीमारी नहीं मेटा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को गलत बताया था। कंपनी का कहना है कि उसने बच्चों की सुरक्षा के लिए कड़े इंतजाम किए हैं। मेटा ने कोर्ट में तर्क दिया कि वो यूजर्स को गुमराह नहीं कर रही है, क्योंकि 'सोशल मीडिया की लत' कोई मान्यता प्राप्त मानसिक बीमारी नहीं है। इन टेक कंपनियों पर भी चल रहे हैं मुकदमे मेटा के अलावा स्नैपचैट, यूट्यूब और टिकटॉक भी अदालतों में हजारों मुकदमों का सामना कर रही हैं। इन कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर अपने एप्स में ऐसे फीचर्स जोड़े जो बच्चों और युवाओं को लत लगा रहे हैं।