भास्कर न्यूज| बारां शहर में चल रहे पावन चातुर्मास के दौरान धार्मिक आयोजनों की शृंखला निरंतर जारी है। जिनालयों में भक्ति, स्वाध्याय और धर्म की बयार बह रही है। इसी क्रम में रविवार को सास-बहू सम्मान समारोह आयोजित किया गया। जिसमें परिवार में प्रेम, संस्कार और आपसी सम्मान की भावना को प्रोत्साहित किया गया। जैन समाज अध्यक्ष विनोद बड़जात्या ने बताया की कार्यक्रम में मुनिश्री गुरुदत्त सागर महाराज के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ लिया। सास-बहू सम्मान समारोह में परिवार की वरिष्ठ महिलाओं एवं बहुओं का सम्मान कर जैन संस्कारों में परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया गया। इस अवसर पर मुनिश्री ने प्रवचन में कहा कि परिवार ही संस्कारों की प्रथम पाठशाला है। सास-बहू का रिश्ता प्रेम, विश्वास, त्याग और समझदारी से मजबूत होता है। घर में यदि एक-दूसरे के प्रति सम्मान और मधुरता का भाव रहे तो वही परिवार धर्म और संस्कारों का केंद्र बन जाता है। उन्होंने कहा कि धर्म केवल मंदिर तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे व्यवहार, वाणी और आचरण में दिखाई देना चाहिए। जैन समाज के मंत्री अनिल बड़जात्या ने बताया कि प्रतिदिन मुनिश्री का नियमित प्रवचन होता है। रविवार को मुनिश्री ने कहा कि मनुष्य जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक सुख प्राप्त करना नहीं, बल्कि आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ना है। हमें प्रतिदिन कुछ समय स्वाध्याय, सामायिक, पूजा और आत्मचिंतन में लगाना चाहिए। धर्म के संस्कार बच्चों और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना भी प्रत्येक परिवार की जिम्मेदारी है। इसी दौरान धर्म परीक्षा का आयोजन भी किया गया। जिसमें श्रद्धालुओं एवं धर्मप्रेमी प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। परीक्षा के माध्यम से धार्मिक ज्ञान, जैन सिद्धांतों एवं संस्कारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया। सांस्कृतिक संयोजक अंकित पाटनी ने बताया कि चातुर्मास के दौरान ऐसे धार्मिक एवं संस्कारमय आयोजनों का उद्देश्य समाज में धर्म के प्रति रुचि बढ़ाना तथा परिवारों को भगवान महावीर के सिद्धांतों से जोड़ना है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे।