नागौर में नगर परिषद चुनाव की मतगणना से पहले सभापति की कुर्सी को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। 14 सितंबर को आने वाले परिणाम से पहले भाजपा और कांग्रेस अपने-अपने पार्षद प्रत्याशियों को साधने में जुटी हैं। इसी बीच भाजपा प्रत्याशियों के बस में जाते हुए वीडियो सामने आया है। बताया जा रहा है कि भाजपा ने अपने प्रत्याशियों के साथ कुछ निर्दलीय प्रत्याशियों की भी गुजरात के आनंद में बाड़ेबंदी की है। जानकारी के अनुसार, भाजपा प्रत्याशियों को आनंद स्थित करीब 25 एकड़ क्षेत्र में फैले मधुबन रिसॉर्ट एंड स्पा में ठहराया गया है। भाजपा की ओर से की गई बाड़ेबंदी में निर्दलीय प्रत्याशियों को मिलाकर करीब 77 उम्मीदवारों के होने की बात सामने आ रही है। हालांकि, पार्टी की ओर से प्रत्याशियों की संख्या को लेकर आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। पार्टी में बिखराव से इनकार जानकारी के अनुसार, भाजपा में लंबे समय से हुकमीचंद टाक की पत्नी संतोष टाक को सभापति पद का चेहरा माने जाने की चर्चाएं हैं। भाजपा प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी का पूरा मैनेजमेंट हुकमीचंद टाक संभाल रहे हैं। इसी बीच भाजपा प्रत्याशी रुकमा देवी के पति पवन कच्छवाह की ओर से सभापति पद पर दावा किए जाने की बात सामने आई है। मामले को लेकर भाजपा के नागौर जिला संगठन प्रभारी जगत नारायण जोशी ने पार्टी में किसी तरह के बिखराव से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा पूरी तरह एकजुट है और सभी प्रत्याशी पार्टी के साथ हैं। प्रवक्ता ने कहा कि कमल ही भाजपा का सभापति पद का चेहरा है। पार्टी में किसी व्यक्ति विशेष को लेकर कोई विवाद नहीं है। भाजपा के 46 और कांग्रेस के 47 प्रत्याशी नागौर नगर परिषद में कुल 60 वार्ड हैं। इस चुनाव में भाजपा ने 46 और कांग्रेस ने 47 प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। इसके अलावा बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में हैं। मतगणना से पहले दोनों प्रमुख दल अपने पक्ष में अधिक से अधिक पार्षद और निर्दलीय प्रत्याशियों को जुटाने में लगे हैं। भाजपा की गुजरात में बाड़ेबंदी को भी इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। निर्दलीय तय कर सकते हैं कुर्सी का समीकरण नगर परिषद में निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका इस बार महत्वपूर्ण हो सकती है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि चुनाव परिणाम के बाद निर्दलीय पार्षद एकजुट होकर अलग तीसरा मोर्चा बना सकते हैं। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन महत्वपूर्ण हो जाएगा। परिणाम आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि भाजपा और कांग्रेस में से किसके पास कितने पार्षद हैं। बहुमत का आंकड़ा किसी एक दल के पक्ष में नहीं होने पर निर्दलीय पार्षद सभापति चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।