राजसमंद में मोही के पास नैनपुरिया गांव में मेवाड़ की प्रसिद्ध लोकनृत्य परंपरा गवरी के समापन पर ज्वारा शोभायात्रा निकाली गई। सवा माह तक चले गवरी मंचन और धार्मिक अनुष्ठानों के समापन पर गांव में उत्सव का माहौल रहा। शोभायात्रा में भील समाज के कलाकारों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला-पुरुष और युवक-युवतियां शामिल हुए। सवा माह तक देवी-देवताओं की आराधना गांव के गोपाल कीर के अनुसार, गवरी के दौरान भील समाज के कलाकार सवा माह तक देवी-देवताओं की आराधना, व्रत और पूजा-अर्चना करते हैं। प्रतिदिन मंदिर में पूजा-आरती के बाद कलाकार आसपास के गांवों में जाकर गवरी का मंचन करते हैं। करीब एक माह तक अलग-अलग गांवों में गवरी मंचन के बाद विसर्जन कार्यक्रम आयोजित किया गया। भक्ति गीत गाते हुए निकले श्रद्धालु विसर्जन के दौरान बैंड-बाजे और डीजे पर बज रहे भक्ति गीतों के बीच ज्वारा शोभायात्रा निकाली गई। महिला-पुरुष और युवक-युवतियां सिर पर ज्वारा धारण कर भजन गाते हुए गांव के प्रमुख मार्गों से गुजरे। श्रद्धालु भगवान के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। हजारों ग्रामीणों की सहभागिता से पूरा गांव भक्तिमय हो गया। शोभायात्रा के साथ ही सवा माह तक चले गवरी मंचन और धार्मिक अनुष्ठानों का विधिवत समापन हुआ।