शहर की पहचान झीलों से है और इन झीलों का छलकना शहर के लिए हर साल उत्सव बन जाता है। फतहसागर के गेट खुलते ही शहरवासी ओवरफ्लो देखने उमड़ते हैं। लेकिन इस बार कमजोर मानसून ने यह तस्वीर बदल दी। सीजन बीतने को है, लेकिन 13 फीट भराव क्षमता वाली फतहसागर में महज 5.9 फीट पानी है। शहर के बीच से गुजरने वाली आयड़ नदी भी पानी को तरस गई। इस बार नदी में 1 इंच भी आवक नहीं हुई। अब तक 37% कम बारिश 53 साल... 30 बार खुले फतहसागर झील के गेट पिछले 53 साल में 30 साल फतहसागर के गेट खुले। कभी अगस्त में ही झील छलकी तो कभी अक्टूबर तक इंतजार करना पड़ा। 2017 में 2 अगस्त सबसे जल्दी, जबकि 1985 और 2013 में 14 अक्टूबर को ओवरफ्लो हुआ। हाल के वर्षों में 2019-20 में 2 सितंबर, 2021 में 7 अक्टूबर और 24 नवंबर (मावठ), 2023 में 13 अगस्त, 2024 में 7 सितंबर और 2025 में 26 अगस्त को गेट खुले। 2025 में 28 अक्टूबर को मावठ में फिर गेट खोलने पड़े। हालात : तरस रहीं झीलें शहर के अलावा ग्रामीण इलाकों के जलाशय भी खाली पड़ी हैं। आयड़... झीलें भरती हैं तो दौड़ती है जलधारा आयड़ नदी गोगुंदा की पहाड़ियों से निकलकर शहर के आयड़ क्षेत्र से गुजरती है। आगे बेड़च नदी के रूप में बहते हुए उदयसागर में मिलती है। नदी में गोगुंदा की पहाड़ियों के साथ छोटा मदार, बड़ा मदार, फतहसागर और पिछोला के छलकने से भी पानी आता है। इस बार ये जलस्रोत पर्याप्त नहीं भर पाए। इससे पूरे वेग से बहने वाली नदी में अभी गंदगी से अटी है।