सदियों पहले महाराजा अग्रसेन ने समाज को एकजुट रखने के लिए ‘एक ईंट और एक रुपया’ का ऐतिहासिक सिद्धांत दिया था। 21वीं सदी के डिजिटल दौर में अग्रवाल समाज ने इसी एकजुटता को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और बिग डेटा से जोड़कर नया प्रयोग किया है। अग्रसेन अग्रोहा अग्रवाल फाउंडेशन का ‘3A’ (अग्रसेन, अग्रोहा, अग्रवाल) प्लेटफॉर्म देश का पहला ऐसा सामाजिक डिजिटल नेटवर्क बन गया है, जो समाज को पारंपरिक बही-खातों से निकालकर सीधे डेटा मैपिंग पर ले आया है। पिछले साल अग्रसेन जयंती पर लॉन्च इस प्लेटफॉर्म से अब तक 25 राज्यों के 222 शहरों से 4,500 से अधिक अग्रबंधु जुड़ चुके हैं। मॉडल के तहत बिखरी हुई 118 अग्र संस्थाओं को एक साझा डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा गया। जयपुर के सर्वाधिक 1,795 सदस्य शामिल हैं, जबकि 10 देशों के 19 शहरों से 36 एनआरआई भी पंजीकृत हो चुके हैं। राजनीतिक-प्रशासनिक मैपिंग: दिल्ली-हरियाणा में 100% संसदीय पकड़ इस डिजिटल प्लेटफॉर्म की सबसे अहम खूबी इसकी राजनीतिक व प्रशासनिक सीमावार मैपिंग है। हरियाणा के बाद अब देश की राजधानी दिल्ली में भी संगठन ने शत-प्रतिशत संसदीय कवरेज दर्ज किया है। दिल्ली की सभी 7 लोकसभा सीटों और 70 में से 69 विधानसभा क्षेत्रों (98.6%) में सक्रिय उपस्थिति दर्ज हो चुकी है। दिल्ली के 11 जिलों में 463 सदस्य और 9 सहयोगी संस्थाएं सीधे इस तंत्र से जुड़ी हैं। राष्ट्रीय स्तर पर अब तक 204 लोकसभा और 578 विधानसभा क्षेत्रों तक नेटवर्क का विस्तार हो चुका है। अगला लक्ष्य: 5 साल में 2 करोड़ अग्रबंधुओं का डेटा, हर वार्ड की होगी अपनी डिजिटल डायरेक्टरी फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष प्रदीप मित्तल के अनुसार, बिखरे हुए सामाजिक तंत्र को एक साझा मंच पर लाने का यह देश में पहला संगठित डिजिटल प्रयास है। संस्थापक महासचिव सीए विजय गर्ग ने बताया कि अगले पांच वर्षों में 2 करोड़ अग्रबंधुओं को जोड़ने की योजना है। समाज की सभी संस्थाएं, संपत्तियां, स्कूल, अस्पताल, भवन व अन्य संपत्तियों को भी जोड़ दिया जाएगा। कोई भी अग्रबंधु वेबसाइट agrasenagroha.com/individual/register पर पंजीकरण करा सकता है। क्यों खास है ‘3A’ मॉडल?; वार्ड स्तर तक मैपिंग: एआई टूल की मदद से जनसंख्या का राज्य, लोकसभा, विधानसभा और वार्ड स्तर पर वर्गीकरण।