शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए 15 साल पहले प्रस्तावित सेक्टर सड़कें अब तक जमीन पर नहीं उतर पाई हैं। मास्टर प्लान-2025 के 81 सेक्टर प्लान में एक क्षेत्र को दूसरे से जोड़ने के लिए 18, 24, 30 और 48 मीटर चौड़ी 500 सड़कें प्रस्तावित की गई थीं। 70% सड़कें अब भी अधूरी हैं या कागजों से बाहर नहीं निकलीं। नतीजा, जिन जमीनों पर सड़कें बननी थीं, वहां कॉलोनियां और निर्माण होते गए। अब सड़क निकालने की बारी आ रही है तो मकान-दुकान बने होने से मामले कोर्ट तक पहुंच रहे हैं। पिछले दो साल में ही जेडीए ने खातीपुरा-सिरसी रोड, न्यू सांगानेर रोड, नंदपुरी अंडरपास से जगतपुरा पुलिया और पीआरएन के वरुण पथ पर कोर्ट के आदेश के बाद कार्रवाई की। मास्टर प्लान के मुताबिक सड़कें चौड़ी करने के लिए 1500 से ज्यादा मकान-दुकानों के निर्माण हटाए गए। इसका कारण प्रस्तावित सेक्टर सड़कों का समय पर डिमार्केशन और जमीन अवाप्त नहीं होना है। खाली और खातेदारी जमीन पर सड़क की सीमा तक तय नहीं होने से बैकडेट सोसायटी पट्टों के आधार पर कॉलोनियां बसती गईं। टोंक रोड के प्रहलादपुरा से सिरसी रोड तक करीब 50 किमी लंबा प्रस्तावित कॉरिडोर प्रहलादपुरा, जगतपुरा, सीतापुरा, सांगानेर, मानसरोवर, भांकरोटा, पांच्यावाला और सिरसी रोड क्षेत्र को जोड़ सकता है, लेकिन 15 साल बाद भी यह पूरा नहीं हुआ। प्रहलादपुरा से सांगानेर तक रेलवे लाइन के समानांतर प्रस्तावित 200 फीट कॉरिडोर की करीब 90% जमीन खाली है। डिग्गी-मालपुरा रोड से अजमेर रोड के बीच करीब 95% और अजमेर रोड से सिरसी रोड तक करीब 70% क्षेत्र खाली है। जेडीए ने अजमेर रोड से सिरसी रोड तक सड़क के लिए टेंडर भी जारी किया था, लेकिन बाद में मामला आगे नहीं बढ़ा। सांगानेर, डिग्गी-मालपुरा रोड से मुहाना और अजमेर रोड से सिरसी रोड के बीच प्रस्तावित सड़क क्षेत्र में बड़ी संख्या में निर्माण हो गए। 81 सेक्टर प्लान, लेकिन नक्शे में ही दिख रही सड़कें जेडीए ने 81 सेक्टर प्लान तो बनाए, लेकिन प्रस्तावित सड़कों की जमीन का समय पर डिमार्केशन नहीं किया। खातेदारों से सड़क के लिए जमीन लेने के बदले मुआवजे के रूप में विकसित भूमि देने की व्यवस्था भी कई जगह बाधा बनी हुई है। अधूरी सड़कों के आगे खाली जमीन पर निर्माण होते जा रहे हैं। घनी आबादी के बीच सड़कें अधूरी छोड़ी