राजस्थान में नियम तोड़ने पर ट्रैफिक सहित अन्य 1.5 लाख पुलिस कर्मियों द्वारा 1 साल में 27.61 लाख चालान काटे गए। इसके दो तिहाई चालान सिर्फ 174 टोल से गुजरते ही वाहनों के कट गए। चलते वाहनों के टोल पार करते ही एक साल में 18 लाख चालान काटे जा चुके। ई-डिटेक्शन चालान एआई आधारित प्रणाली से काटे जा रहे। इन चालानों से सरकार 1188 करोड़ रुपए जुर्माना वसूल चुकी। सीएस वी. श्रीनिवास के सामने पेश की गई परिवहन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रदेश के टोल प्लाजा पर ई-डिटेक्शन प्रणाली लागू की है। इससे बिना वैध दस्तावेजों, जैसे टैक्स, फिटनेस, बीमा एवं पीयूसीसी आदि के संचालित वाहनों के विरुद्ध आटोमैटिक चालान किए जा रहे हैं। 18 लाख चालान जारी किए जा चुके। इनके जुर्माने की राशि करीब 1188 करोड़ रुपए है। चालान के लिए एआई ऐसे करती है काम राजस्थान में परिवहन विभाग द्वारा लागू की गई ई-डिटेक्शन प्रणाली एआई आधारित है। इस तकनीकी से हाइवे या टोल प्लाजा पर वाहनों को रोकने की जरूरत नहीं पड़ती। जब वाहन किसी टोल प्लाजा या ई-डिटेक्शन कैमरों के नीचे से गुजरता है, तो नंबर प्लेट स्कैनिंग, 5 प्रकार के डेटाबेस से मिलान कर लिया जाता है। इससे पता चल जाता है कि वाहन ने बीमा, प्रदूषण सहित क्या दस्तावेज पूरे नहीं किए। बकाया टैक्स का चालान तुरंत कट जाता है। ओवरलोडिंग होने पर ई-रवन्ना और माइनिंग रिकॉर्ड के टोल डेटा से मिलान कर चालान काटे जा रहे। व्हीकल स्क्रैपिंग नीति-2025 प्रभावी नहीं, पुराने वाहन दौड़ रहे: सीएस के सामने आया कि प्रदेश में पुराने वाहनों को हटाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश हैं। लेकिन राजस्थान व्हीकल स्क्रैपिंग नीति-2025 अधिसूचित तो कर दी, लेकिन प्रभावी रूप से लागू नहीं की। इससे पुराने वाहन धड़ल्ले से दौड़ रहे। अब अफसरों ने बताया कि स्क्रैपिंग सर्टिफिकेट के आधार पर नया वाहन खरीदने पर 16 से 26 प्रतिशत तक, अधिकतम एक लाख रुपये की टैक्स छूट का प्रावधान किया गया है। 900 एसी और ब्लू बसें भी नहीं आईं: राजस्थान रोडवेज के बेड़े में एसी एवं ब्लू लाइन बसों तथा इलेक्ट्रिक बसों सहित लगभग 900 नई बसें आनी थी। वो नहीं आई हैं। अफसरों ने बताया कि बस शहरों तक पहुंचने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। अजमेर, भरतपुर, दूदू, कोटा, उदयपुर,अलवर तथा कुछ जिला मुख्यालयों एवं कस्बों में आधुनिक बस स्टैंड बनाए जा रहे हैं।