जिले में मौसमी बीमारियों का कहर जारी है। वायरल बुखार, सांस की तकलीफ और अस्थमा के अटैक ने स्वास्थ्य तंत्र की सांसें फुला दी हैं। हालत यह है कि सोमवार का हाफ-डे होने के बावजूद जिला अस्पताल की ओपीडी 3352 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जबकि इस महीने के महज 21 दिनों में 74,712 मरीज इलाज करा चुके हैं। ग्रामीण इलाकों में पीएचसी-सीएचसी पर डॉक्टरों नहीं होने से अस्पताल ओवरलोड चल रहा है। कोविड के बाद लोगों की घटी इम्युनिटी के चलते लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। सुबह 11 बजे निर्धारित ओपीडी समय समाप्त होने के बाद भी दोपहर 2 बजे तक कतारें लगी रहीं और खुद अस्पताल अधीक्षक डॉ. हनुमानराम चौधरी को ओपीडी में मरीजों की जांच करनी पड़ी। मेडिसिन विभाग के डॉ. मनीष बैरवा ने बताया कि 15 से 20 दिन खांसी, वायरल के साथ सीओपीडी के मरीज बढ़े। कोविड के बाद की शारीरिक इम्युनिटी में आई गिरावट और मौसम के लगातार बदलते मिजाज के कारण वायरल फीवर के बाद की खांसी 15 से 20 दिन तक लंबी खिंच रही है। सीओपीडी और अस्थमा के मरीजों को इस संक्रमण काल में दोहरा खतरा है, इसलिए धूल-मिट्टी से बचाव और पल्मोनरी हाइजीन जरूरी है। बेड फुल, गलियारों में कतारें व 180 मरीज रोज हो रहे भर्ती अस्पताल में स्वीकृत 500 बेड के मुकाबले फिलहाल 638 बेड संचालित किए जा रहे हैं, फिर भी बीते 21 दिनों से नो बेड की स्थिति बनी हुई है। ओपीडी का दबाव ऐसा है कि प्रतिदिन 170 से 180 मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है। सामान्य से कम गंभीर मरीजों को डे-केयर सेंटर में ड्रिप लगाकर अगले दिन बुलाया जा रहा है। सेंट्रल लैब में जांचों का भार डेढ़ गुना बढ़ गया है। इमरजेंसी विंग में भी पैर रखने की जगह नहीं है, जहां अस्थमा के मरीजों की संख्या दोगुना बढ़ी है।