पाली नगर निगम चुनाव में 65 में से 29 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी कांग्रेस की फूट सबके सामने आ गई है। वहीं प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के गृह नगर में सिर्फ 21 वार्ड में जीत के बाद बैकफुट पर नजर आ रही भाजपा कांग्रेस में फूट और पूर्व सभापति प्रदीप हिंगड़ के बगावती तेवर को अवसर के तौर पर देख रही है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के गुट से जुड़े नेताओं के साथ पूर्व विधायक ज्ञानचंद पारख भी सक्रिय हो गए हैं और निर्दलीय पार्षदों को साधने का प्रयास कर रहे हैं। भाजपा अपने 21 पार्षदों को बाड़ेबंदी कर एक जगह ले गई है। इधर, शुक्रवार को बीजेपी की बागी पूर्व सभापति कुसुम सोनी और पुष्पा सोमनानी के साथ निर्दलीय रशीदा ने नाम वापस लिया। अब भाजपा से नमिता बुबकिया, कांग्रस की सुमित्रा जैन और निर्दलीय राजबाला हिंगड़ में टक्कर है। इनसाइड स्टोरी : कांग्रेस में कब,कैसे और क्यों पड़ी फूट हिंगड़ के समर्थन में नारे लगाए राजनीतिक विश्लेषक वकील भागीरथसिंह राजपुरोहित बताते हैं कि कांग्रेस की ओर से पूर्व सभापति प्रदीप हिंगड़ की पत्नी राजबाला और कांग्रेस नेत्री सुमित्रा जैन को मेयर पद का दावेदार माना जा रहा था। 14 सितंबर को शपथ कार्यक्रम में कांग्रेस के 24 पार्षद हिंगड़ के साथ आए। राजबाला हिंगड़ के जन्मदिन का केक वहीं पर काटा और नारे लगाए- हमारा मेयर कैसा हो… राजबाला हिंगड़ जैसा हो। बिना पूछे बाड़ेबंदी रिजल्ट वाले दिन शपथ ग्रहण के बाद रात को 29 में से 24 जीते हुए कांग्रेसी पार्षदों को बाड़ेबंदी में लेकर प्रदीप हिंगड़ अजमेर के विजयनगर इलाके में एक रिसॉर्ट में चले गए। ये पार्षद 16 सितंबर को मेयर के नामांकन में भी नहीं दिखे। बाकी 5 पार्षद सुमित्रा जैन के साथ पाली में दिखे। बिना पूछे बाड़ाबंदी से कांग्रेस जिलाध्यक्ष शिशुपालसिंह और विधायक भीमराज भाटी समेत बाकी नेता नाराज हो गए। उन्होंने प्रदेश नेताओं तक यह बात पहुंचाई। सिंबल सुमित्रा जैन को दिया पीसीसी चीफ डोटासरा ने पाली में पहले से नियुक्त प्रदेश प्रभारी हेमसिंह शेखावत के बजाय पीसीसी से ताराचंद सैनी को पर्यवेक्षक बना 16 सितंबर को दो सिंबल देकर पाली भेज दिया। इससे पहले राजबाला हिंगड़ और सुमित्रा जैन ने एक-एक नामांकन कांग्रेस और एक-एक निर्दलीय के रूप में नामांकन जमा करा दिया। दोपहर 3 बजे से पहले ही जयपुर से आए पर्यवेक्षक ने विधायक भाटी के भाई लक्ष्मीनारायण के साथ सुमित्रा जैन के नाम का सिंबल जमा करा दिया। विधायक भाई से मारपीट से बात और बिगड़ी विधायक भीमराज भाटी का आरोप है कि सिंबल जमा करा लौटते समय उनके भाई लक्ष्मीनारायण के साथ हिंगड़ समर्थकों ने मारपीट की। अब पूर्व सभापति और विधायक भाटी- कांग्रेस जिलाध्यक्ष खुलेतौर पर एक-दूसरे के खिलाफ हो गए। कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग की आशंका पाली में भाजपा के महज 21 प्रत्याशी जीते हैं। जो 15 निर्दलीय जीते हैं, उनमें 10 कांग्रेसी विचारधारा, 1 निर्दलीय और 4 भाजपा से बागी हैं। कांग्रेस के जीते हुए 29 में से 24 पार्षद राजबाला हिंगड़ की बाड़ाबंदी में हैं। राजबाला ने निर्दलीय के रूप में मेयर के लिए नामांकन अलग से जमा कराया है। ऐसे में यदि कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग होती है तो फायदा बीजेपी को मिल सकता है। लेकिन भाजपा में भी भीतरघात का भय राजनीतिक विश्लेषक बताते है कि ऐसा नहीं है कि भीतरघात का भय भाजपा को नहीं है। 2019 के नगर परिषद सभापति के चुनाव में कांग्रेस की ओर से पूर्व सभापति प्रदीप हिंगड़ की पुत्रवधु हेतल हिंगड़ चेयरमैन की उम्मीदवार थी। उस समय हिंगड़ के पक्ष में भाजपा के पांच वोट क्रॉस हुए थे। वहीं हिंगड़ के खिलाफ कांग्रेस में भी चार वोट क्रॉस हुए थे। हिंगड़ सभापति का चुनाव हार गए थे। हिंगड़ को जोड़तोड़ में माहिर माना जाता है। भीतरघात के भय से भाजपा अपने जीते हुए 21 मेंबर को बाड़ेबंदी में ले गई है। भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा- पार्टी एकजुट और बोर्ड हमारा बनाएंगे भाजपा जिलाध्यक्ष सुनील भंडारी का कहना है कि हमारे उच्च नेतृत्व ने पाली में भाजपा का मेयर बनाने की रणनीति बना ली है। हम लोग पाली में एक बार फिर बोर्ड बनाएंगे। पार्टी में कहीं भी भीतरघात का भय नहीं है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष का दावा- बोर्ड कांग्रेस का बनेगा कांग्रेस जिलाध्यक्ष शिशुपाल सिंह निंबाड़ा का कहना है कि शहर की जनता ने कांग्रेस पर विश्वास जताया है। हमारी पार्टी के सभी 29 पार्षद पार्टी को ही मत देंगे। निर्दलीय को मिलाकर हमारा आंकड़ा 40 के पार जाएगा। अनुशासनहीनता करने वाले नेताओं को पार्टी से बाहर किया जाएगा। सिंबल बेचा गया, चुनाव बाद उन नेताओं के नाम उजागर करूंगा : प्रदीप हिंगड़ पूर्व सभापति एवं कांग्रेस नेता प्रदीप हिंगड़ का कहना है कि पीसीसी चीफ डोटासरा ने उनकी पत्नी राजबाला का सिंबल फाइनल किया। 16 सितंबर को नामांकन के अंतिम दिन सुबह से ही पर्यवेक्षक से मिलना चाह रहे थे, लेकिन स्थानीय नेता बरगलाते रहे कि आपकी पत्नी के नाम का सिंबल 3 बजे तक जमा हो जाएगा। दो बजे पता चला कि पर्यवेक्षक ने सिंबल सुमित्रा के नाम से जमा करा दिया। हिंगड़ का दावा है कि विधायक, जिलाध्यक्ष यह कहते रहे कि पर्यवेक्षक राजबाला के नाम का दूसरा सिंबल लेकर आ रहे है। ऐसे में उनके लोग पर्यवेक्षक को ढूंढ़ते रहे,लेकिन वे विधायक भाटी के भाई के साथ घूम रहे थे। हिंगड़ का कहना है कि विधायक और उनके भाई जिस कांग्रेस प्रत्याशी सोहन पारख समेत अन्य लोगों पर मारपीट और 20 हजार रुपए लूटने के आरोप लगा रहे है। वे लोग सालाना लाखों रुपए का टैक्स सरकार के खजाने में जमा कराते है। मारपीट का आरोप बेबुनियाद है। यदि यह साबित हो जाता है तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा। उन्होंने कहा-सिंबल बेचने वाले नेताओं के नाम चुनाव बाद उजागर करुंगा। विधायक बोले- हम तो राजबाला के पक्ष में ही थे, मगर पर्यवेक्षक ने पहले जमा करा दिया सिंबल पाली विधायक भीमराज भाटी का कहना है कि जयपुर से पीसीसी से भेजे पर्यवेक्षक ताराचंद सैनी ने सिंबल जमा करवाया। हम आखिरी समय तक प्रयास में जुटे रहे कि राजबाला के पक्ष में सिंबल जमा हो जाए। जयपुर से आए पर्यवेक्षक से पार्टी हाईकमान ने कहा था कि ढाई बजे के बाद सिंबल पेश कर देना। पर्यवेक्षक ने इससे पहले ही नाम भरकर सिंबल पेश कर दिया। मेरा भाई पर्यवेक्षक के साथ बारसा रिसोर्ट से दूसरा सिंबल लेने जा रहा था। रास्ते में हिंगड़ के लोगों ने मेरे भाई से मारपीट की। सिंबल और नकदी लूट ली। इस तरह की गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं की जा सकती।