पाली में श्रीपरमहंस अथर्व आयुर्धाम में आयोजित बोन मिनरल डेंसिटी (बीएमडी) जांच शिविर में शहरवासियों की हड्डियों की सेहत को लेकर चिंताजनक स्थिति सामने आई। जांच में शामिल लोगों में 90 प्रतिशत ओस्टियोपेनिया यानी हड्डियों के क्षरण की शुरुआती अवस्था में मिले, जबकि 10 प्रतिशत लोग ओस्टियोपोरोसिस की श्रेणी में पाए गए। बात यह रही कि जांच में किसी भी व्यक्ति का टी-स्कोर सामान्य स्तर पर नहीं मिला। रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं में 88 प्रतिशत ओस्टियोपेनिया और 12 प्रतिशत ओस्टियोपोरोसिस की स्थिति मिली। वहीं पुरुषों में 91.4 प्रतिशत ओस्टियोपेनिया और 8.6 प्रतिशत ओस्टियोपोरोसिस दर्ज हुआ। 95 प्रतिशत लोग ओस्टियोपेनिया से प्रभावित 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में हड्डियों के कमजोर होने की समस्या अधिक पाई गई। वहीं 40 से 50 वर्ष आयु वर्ग में भी करीब 95 प्रतिशत लोग ओस्टियोपेनिया से प्रभावित मिले। 25 से 39 वर्ष के युवाओं में भी हड्डियों का घनत्व सामान्य नहीं पाया गया। हड्डियों का कमजोर होना साइलेंट बीमारी चिकित्सक डॉ. अखिल व्यास ने बताया- हड्डियों का कमजोर होना एक साइलेंट बीमारी है, जिसके शुरुआती लक्षण आसानी से नजर नहीं आते। उन्होंने कहा कि हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम के साथ विटामिन-डी भी जरूरी है। उन्होंने रोजाना 20 से 30 मिनट धूप लेने, दूध-दही, तिल और हरी सब्जियों जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों का सेवन करने तथा नियमित पैदल चलने की सलाह दी। उन्होंने 40 वर्ष की उम्र के बाद तथा मेनोपॉज के दौरान महिलाओं और बुजुर्गों को जरूरत के अनुसार बीएमडी जांच कराने की बात कही। शिविर में रूपेश सिसोदिया, धीरेन्द्र सोनी, मनीष, अमित कुशवाह और रिया कंवर मौजूद रहे।