पाली में नगर निगम के 65 वार्डों के नतीजे सामने आने के बाद अब मेयर की कुर्सी को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। मेयर बनने के लिए भाजपा ने अपना उम्मीदवार नमिता बुबकिया और कांग्रेस ने सुमित्रा जैन को घोषित कर दिया है। वहीं निर्दलीय कुसुम सोनी, पुष्पा सोमनानी, रशिदा-मोहसीन खत्री भी मैदान में हैं। पूर्व सभापति प्रदीप हिंगड़ की पत्नी राजबाला हिंगड़ ने भी मेयर पद के लिए दावेदारी की थी। उन्होंने एक नामांकन कांग्रेस से और एक निर्दलीय भरा था। कांग्रेस पार्टी ने सिंबल सुमित्रा जैन को दिया। ऐसे में अब वे निर्दलीय मैदान में हैं। 'शुक्रवार को नाम वापसी का अंतिम दिन है, राजबाला पर नजरें रहेंगी कि वे अपना नाम वापस लेती हैं या निर्दलीय मैदान में डटी रहती हैं। अगर वे निर्दलीय मैदान में रहीं तो इस बार मेयर बनने के लिए काफी जोड़-तोड़, क्रॉस वोटिंग देखने को मिल सकती है। यह भी पढ़े - कांग्रेस का सिंबल देकर लौट-रहे विधायक के भाई से मारपीट:निर्दलीय का दावा- हमारे साथ दोनों पार्टियों के पार्षद; भाजपा की बागी ने पर्चा भरा निर्दलीय बनेंगे किंग मेकर, बहुमत का आंकड़ा 33 का बता दें कि पाली में कांग्रेस के 29, भाजपा के 21 पार्षद, निर्दलीय 15 जीते हैं। दोनों ही पार्टियों को स्पष्ट बहुमत नहीं है। ऐसे में निर्दलीय किंग मेकर बनेंगे। कांग्रेस को निगम में बोर्ड बनाने के लिए 4 और भाजपा को 12 पार्षदों की जरूरत है। निर्दलियों की रहेगी अहम भूमिका अब मेयर चुनाव में सबसे अहम भूमिका 15 निर्दलीय पार्षदों की रहेगी। कांग्रेस 29 और भाजपा 21 सीटों के साथ बहुमत के आंकड़े से दूर है, इसलिए दोनों दल निर्दलीय पार्षदों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश में जुटी हैं। कांग्रेस इसमें भाजपा से कुछ आगे है लेकिन बुधवार को सिंबल जमा करवाने के बाद कांग्रेस विधायक भीमराज भाटी के भाई मारपीट होने से और राजबाला हिंगड़ की जगह सुमित्रा जैन को सिंबल मिलने से राजबाला के समर्थन और उनके पक्ष के पार्षद कुछ नाराज हैं। इसका फायदा भाजपा उठा पाएगी या कांग्रेस अपना मेयर बनाने के लक्ष्य में कामयाब होगी, ये देखना होगा। कुल मिलाकर अगले कुछ दिन पाली नगर निगम की सत्ता के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं। भाजपा-कांग्रेस प्रत्याशियों की प्रोफाइल कांग्रेस की सुमित्रा जैन- 65 साल की सुमित्रा कांग्रेस में लंबे समय से सक्रिय हैं। पाली जिलास्तर पर और प्रदेश स्तर पर कई पदों पर रह चुकी हैं। उन्होंने बीए तक पढ़ाई की है। उन्होंने वार्ड 34 से कांग्रेस के सिंबल से चुनाव लड़ा जिसमें कांग्रेस से बागी होकर मैदान में उतरे अभिषेक चोपड़ा को 291 वोट से हराया। इस वार्ड से भाजपा ने प्रीति संचेती को मैदान में उतारा था। जो तीसरे स्थान पर रहीं। भाजपी की नमिता बुबकिया - 47 साल की नमिता बुबकिया पूर्व पार्षद विकास बुबकिया की पत्नी हैं। पेशे से गृहिणी और केमिकल व्यवसायी हैं। उन्होंने B.com तक की पढ़ाई की है। पहली बार चुनावी मैदान में वार्ड 33 से उतरी हैं। उन्होंने कांग्रेस के सोहनलाल को 90 वोट से हराया। भाजपा के 21, कांग्रेस के 29 पार्षद, निर्दलीय 15 कांग्रेस 29 पार्षदों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है, जबकि भाजपा के 21 और 15 निर्दलीय पार्षद चुने गए हैं। निगम में पिछले दो कार्यकाल भाजपा के रहे हैं। इस बार कांग्रेस बहुमत के मामले में भाजपा से आगे है लेकिन जिस तरह की स्थितियां फिलहाल बन रही हैं उसे देखकर ये कहना मुश्किल है कि मेयर कौनसी पार्टी से होगा। कांग्रेस और भाजपा दोनों ने ही अपने पार्षदों की बाड़ेबंदी कर रखी है। मेयर बनने के लिए 6 प्रत्याशियों ने भरे 10 नामांकन कल होगी नामांकन की जांच मेयर पद के लिए 17 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 18 सितंबर को दोपहर 3 बजे तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। नाम वापसी के बाद इसी दिन चुनाव चिह्नों का आवंटन किया जाएगा। इसके बाद 21 सितंबर को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक मेयर पद के लिए मतदान होगा। मतदान के तुरंत बाद मतगणना कर परिणाम घोषित किया जाएगा।