कम मानसून के कारण इस साल उदयपुर की झीलें आधी भी नहीं भर पाईं। शहर में पेयजल संकट दस्तक देने को है। इससे निपटने के लिए पानी की हर बूंद के हिसाब की जरूरत है, लेकिन जिम्मेदार सरकारी महकमों को यह तक नहीं पता कि शहर में रोज कितना भूजल निकाला जा रहा है। शहर में कितने घरों में ट्यूबवेल हैं? कितने आरओ प्लांट धड़ल्ले से पानी का कारोबार कर रहे हैं? इसका कोई ताजा आंकड़ा सरकार के पास नहीं है। सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत इन सवालों पर जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) और भूजल विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। झील विकास प्राधिकरण के पूर्व सदस्य तेजशंकर पालीवाल ने आरटीआई के तहत शहर में निजी ट्यूबवेलों और संचालित आरओ प्लांटों का ब्योरा मांगा था। जवाब में महज डेढ़ दर्जन ट्यूबवेलों और 4 कुएं-बावड़ियों की जानकारी दी गई है। इन्हीं से संबंधित इलाकों में पानी की सप्लाई का जिक्र भी है। भूजल दोहन से जुड़े सवाल पर पीएचईडी ने जवाब दिया- यह सूचना हमारे कार्यालय से संबंधित नहीं है। दूसरी तरफ भूजल विभाग ने कहा कि यह जानकारी हमारे विभाग के कार्यक्षेत्र में नहीं आती। ऐसे में जब शहर की प्यास बुझाने का मुख्य जरिया भूजल और झीलें हैं तो फिर इसके अनियंत्रित दोहन की निगरानी कौन कर रहा है? बिना आंकड़ों के अवैध भूजल दोहन पर कार्रवाई किस आधार पर हो रही है? वाटर प्लांट: 99 पंजीकृत थे, अब पता नहीं कितने पालीवाल के अनुसार जिला उद्योग केंद्र ने करीब तीन वर्ष पहले लिखित जानकारी में बताया था कि पेयजल का व्यापार करने वाले 99 प्लांट पंजीकृत हैं। लेकिन अब शहर में ऐसे कितने प्लांट संचालित हैं, कितने बंद हो चुके हैं और कितने नए जुड़े हैं, इसका ताजा आंकड़ा सामने नहीं है। यहीं से विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़ा होता है। एक विभाग ने तीन साल पहले 99 प्लांट का आंकड़ा दिया, लेकिन वर्तमान स्थिति जानने के लिए दूसरे विभागों के पास कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं है। आरओ: 2 से 3 लीटर पानी की बर्बादी एक आरओ प्लांट में एक लीटर पानी साफ करने के दौरान करीब दो से तीन लीटर पानी व्यर्थ होकर नालियों में चला जाता है। ऐसे समय में जब शहर में पेयजल की कमी है, पानी के व्यावसायिक इस्तेमाल और आरओ प्रक्रिया में होने वाली बर्बादी की निगरानी जरूरी है। उन्होंने पेयजल के व्यापार को बंद करने की मांग भी की है। जवाब: 18 ट्यूबवेल-4 कुएं-बावड़ियां आरटीआई से मिले दस्तावेज में नगर उपखंड चतुर्थ के अंतर्गत 18 नलकूप और 4 कुएं-बावड़ी स्रोत दर्ज हैं। इनमें टैगोर नगर, समता नगर सेक्टर-3, शांति नगर सेक्टर-5, मनवाखेड़ा, पीकेएम पंप हाउस, मेवाड़ विद्या मंदिर और खरबड़िया के ट्यूबवेल शामिल हैं। इनसे श्रीराम कॉलोनी, बंजारा बस्ती, टेलीफोन कॉलोनी, सेक्टर-5, मनवाखेड़ा, डी-ब्लॉक, करणी नगर, आर-1 कॉलोनी, कॉम्प्लेक्स, हनुमान नगर आदि इलाकों में पानी की सप्लाई की जाती है। सेक्टर-3, 4, 5, 6, पानेरियों की मादड़ी, संतोष नगर, स्वामी नगर आदि क्षेत्रों में भी सप्लाई का उल्लेख है। चिंता इसलिए: बांध सूखे, इनसे आवक की उम्मीद नहीं, कैसे कटेगी गर्मी? उदयपुर में हर मानसून सीजन में 640 मिलीमीटर बरसात होती है। इस बार 384 मिमी ही हुई है। नतीजतन शहर की झीलें आधी भी नहीं भर पाई हैं। 11 फीट क्षमता वाली पिछाेला में 7.2, जबकि फतहसागर (13) में 6 फीट के आसपास पानी है। पिछोला को भरने वाले कैचमेंट के बांध तक सूखे हैं। इधर, बीते 20 सितंबर से शहर में 72 घंटे यानी हर तीसरे दिन के अंतराल पर पानी की सप्लाई शुरू की गई है। उद्देश्य उपलब्ध जल भंडार को सहेजकर अगले साल अगस्त तक शहर की पेयजल व्यवस्था को सुचारू बनाए रखना है।