खबर है कि भाजपा में अब बड़े स्तर पर ऑपरेशन होने की तैयारी है। सोमवार को जो स्थिति हुई उसकी मूल वजह भाजपा का चुनाव नतीजों में पिछड़ना है। आखिर वो क्या कारण हैं जिसकी वजह से सिर्फ 27 सीटें ही आई। इसमें टिकट वितरण से लेकर प्रत्याशियों को हराने वालों की भूमिका से लेकर किन नेताओं ने पार्टी के भीतर रहकर नुकसान पहुंचाया उन सभी पर एक्शन होगा। मगर उससे भी पहले एक्शन उन लोगों पर हो सकता है जिन्होंने क्रॉस वोट किए। मगर सवाल वही कि आखिर इसकी पहचान कैसे होगी। क्योंकि इसमें दो पेच है। अगर ये पहचान हो गई कि क्रॉस वोट किसने किए तो इससे निर्वाचन प्रणाली पर सवाल उठेंगे क्योंकि मतपत्र गोपनीय होता है। बावजूद इसके दोनों पार्टियां क्रॉस वोटिंग करने वालों की पहचान करने की कोशिश कर रही हैं। खबर ये भी है कि पार्षद चुनाव के तुरंत बाद एक बड़े भाजपा नेता के यहां दो निर्दलीय पार्षदों की बाड़ेबंदी की गई थी। मगर मतगणना वाले दिन दोनों कांग्रेस खेमे में देखे गए। इसको लेकर भी संगठन के कई वरिष्ठ नेताओं की टीम पड़ताल कर रही है। यदि आरोप सही मिलते हैं तो इस नेता पर पार्टी से निष्कासन जैसी कठोर कार्रवाई की जा सकती है। क्रॉस वोटिंग की गुत्थी कौन सुलझाएगा? मेयर चुनाव के बाद क्रॉस वोटिंग की गुत्थी ऐसी उलझी है जिसे कांग्रेस, भाजपा के रणनीतिकार भी नहीं सुलझा पा रहे हैं। भले ही कांग्रेस को 50 वोट मिले हों पर कांग्रेस के भीतर क्रॉस वोटिंग होने का दावा अभी भी किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक भाजपा के सिंबल पर जीतने वाले पार्षदों ने भी कांग्रेस को वोट दिए हैं। अब सवाल ये है कि कांग्रेस से कितने पार्षदों ने क्रॉस वोंटिंग की और भाजपा खेमे से कितने पार्षद फिसले। अप्रत्याशित नतीजों के बाद भाजपा के नेता अपने खेमे से क्रॉस वोटिंग करने वालों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं। मेयर चुनाव के मतपत्रों पर नंबरिंग थी। मगर निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों ने मतपत्र िमक्स कर दिए। इसलिए ये पता लगना मुश्किल है कि किसने किसके पक्ष में वोट किया।