अलवर में भाजपा के राजस्थान प्रभारी संजय भाटिया ने कहा- राजस्थान में हर पांच साल में सरकार बदलने का मिथक है। भाटिया ने कहा- मुझे लगता है कि इस बार रिजल्ट हमारे पक्ष में ही आएगा। अलवर भाजपा कार्यालय में कार्यकर्ताओं की बैठक में बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाटिया ने कहा- राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी का बहुत स्ट्रॉन्ग संगठन है। वहीं भाटिया ने GenZ के लिए कहा- ये हमारे देश का भविष्य हैं। ये हमारे बेटे-बेटियां हैं। ये हमेशा निष्पक्ष रहे हैं। इनको क्या साधना, ये देश से प्यार करने वाले बच्चे हैं। उन्होंने पंचायत चुनाव के लिए कहा- ग्रामीण सरकार के लिए अधिक मेहनत की जरूरत है। वहीं भाटिया ने कहा- पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी ही पार्टी के अगेंस्ट सारे विधायकों को इकट्ठा करके निकल गए थे। सवाल- शहरी सरकार में भाजपा का पलड़ा भारी रहता है, लेकिन ग्रामीण में ऐसा नहीं होता। जवाब- इसका एक ही तरीका है- अधिक श्रम, अधिक श्रम, अधिक मेहनत। कार्यकर्ता अगर दिन-रात मेहनत करता है तो मुझे लगता है कि शहर हो या ग्रामीण, रिजल्ट अच्छा आता ही है। सब लोग बहुत जागरूक हैं। प्रदेश में भाजपा की सरकार है। हम चाहते हैं कि बड़े-बड़े नेशनल प्रोजेक्ट्स के साथ गांव का विकास भी समान रूप से हो। गांव की सरकार बननी ही चाहिए। सवाल- पंचायत समिति चुनाव में पार्टी की टिकट बांटने को लेकर क्या प्राथमिकता रहेगी? जवाब- मुझे लगता है कि हमारे यहां निर्णय सामूहिकता के रहते हैं। कोई परिवार की पार्टी नहीं है। अन्य दलों में जैसे एक परिवार का ही शासन रहता है, जिसको मन किया, जिसको पसंद आया। हमारे यहां निर्णय सामूहिक रूप से होते हैं। ग्राउंड से निर्णय होकर प्रदेश में आएगा, उसके बाद हम मुहर लगाएंगे। जहां एक से ज्यादा नाम आ गया और सहमति नहीं बन रही तो उसमें प्रदेश अपनी मुहर लगा देगा। सवाल- राजस्थान में ट्रेंड है कि सरकार हर बार बदलती है। जवाब- मैं आया तो मुझे भी ये बात बताई गई। मैं हरियाणा से आया हूं, जहां तीसरी बार भाजपा की सरकार है। हरियाणा में संगठन बहुत बाद में और राजस्थान में बहुत पहले से ही संगठन मजबूत है। यहां एक से एक बडे़ नेता रहे हैं। राजस्थान में हर बार सरकार बदलने का मिथ है और इतिहास है। मुझे लगता है कि इस बार रिजल्ट हमारे पक्ष में ही आएगा। सवाल- राजस्थान में पुलिस बाड़ेबंदी में घुसी। जवाब- ये चुनाव है। एक विचार के लोग, चाहे वो इंडिपेंडेंट हैं, चाहे किसी दल से जुड़े हुए हैं। जब उनकी मर्जी से फैसला नहीं होता, तब वो इकट्ठा होकर एक स्थान पर जाते हैं। मुझे याद आता है, कांग्रेस का हाईकमान पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को बोल रहा था कि आप संगठन में केंद्र में आ जाओ, यहां छोड़ो। वे अपनी ही पार्टी के खिलाफ सारे विधायकों को एकत्र करके निकल गए थे। वे दिल्ली नहीं गए।