डेटिंग ऐप पर किसी आकर्षक प्रोफाइल से मैच होना, चैटिंग शुरू होना और कुछ ही दिनों में मुलाकात का प्लान बन जाना सामान्य लग सकता है। लेकिन साइबर अपराधियों ने इसी भरोसे को ठगी का नया हथियार बना लिया है। फर्जी प्रोफाइल के जरिए दोस्ती करने के बाद पीड़ित को चुनिंदा कैफे या रेस्टोरेंट में बुलाया जाता है। वहां खाने-पीने का ऑर्डर कराने के बाद कथित तौर पर हजारों से लेकर लाखों रुपए तक का बिल थमाकर भुगतान के लिए दबाव बनाया जाता है। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने डेटिंग और मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म के जरिए होने वाली ठगी को लेकर लोगों को सतर्क किया है। पुलिस ने फर्जी प्रोफाइल, चोरी की तस्वीरों और झूठी पहचान के जरिए भावनात्मक रूप से फंसाने वाले साइबर अपराधियों से सावधान रहने की अपील की है। सोशल मीडिया पर भरोसा जीतकर शिकार बनाते हैं ठग राजस्थान साइबर थाना प्रभारी गजेंद्र शर्मा ने बताया कि साइबर ठग आकर्षक तस्वीरों, अच्छी नौकरी, महंगी लाइफस्टाइल और दिलचस्प शौक वाली फर्जी प्रोफाइल तैयार करते हैं। मैच होने के बाद बातचीत डेटिंग एप से निकलकर वॉट्सएप या दूसरे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म तक पहुंच जाती है। लगातार चैटिंग और कई मामलों में वीडियो कॉल के जरिए भरोसा मजबूत किया जाता है। इसके बाद मुलाकात का प्रस्ताव रखा जाता है। अक्सर सामने वाला अपनी पसंद के किसी खास कैफे, बार या रेस्टोरेंट में मिलने पर जोर देता है। अगर सामने वाला सार्वजनिक स्थान की बजाय किसी खास जगह पर मिलने के लिए लगातार दबाव बनाए तो यह खतरे का संकेत हो सकता है। कैफे पहुंचते ही बदल जाता है पूरा खेल पीड़ित जब बताए गए कैफे में पहुंचता है तो शुरुआत में सामान्य बातचीत होती है। इसके बाद ड्रिंक, स्नैक्स, हुक्का या महंगे खाने-पीने के सामान का ऑर्डर कराया जा सकता है। कुछ देर बाद डेट पर आया व्यक्ति किसी बहाने से वहां से चला जाता है। इसके बाद टेबल पर आता है ऐसा बिल, जिसे देखकर पीड़ित के होश उड़ सकते हैं। 15 हजार से 2 लाख रुपए तक के बिल का दबाव कई मामलों में बिल हजारों रुपए से लेकर 50 हजार रुपए या उससे भी अधिक हो सकता है। कुछ मामलों में लाखों रुपए तक भुगतान के लिए दबाव बनाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। बिल पर सवाल उठाने या भुगतान से इनकार करने पर कैफे के कर्मचारी, मैनेजर या बाउंसर कथित तौर पर दबाव बना सकते हैं। ऐसे मामलों में डराने-धमकाने से लेकर जबरन भुगतान कराने की स्थिति तक बन सकती है। यानी डेटिंग ऐप पर शुरू हुई दोस्ती कुछ ही घंटों में ठगी और वसूली में बदल सकती है। फर्जी फोटो से AI प्रोफाइल तक का नया खेल साइबर ठग अब केवल दूसरे लोगों की तस्वीरों का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से ऐसी तस्वीरें और प्रोफाइल भी तैयार की जा सकती हैं, जो पहली नजर में वास्तविक लगें। इसीलिए साइबर विशेषज्ञ अनजान प्रोफाइल पर सिर्फ फोटो देखकर भरोसा नहीं करने की सलाह देते हैं। प्रोफाइल की जानकारी, सोशल मीडिया गतिविधि और बातचीत के पैटर्न को भी जांचना जरूरी है। डेटिंग ऐप के जरिए हनी-ट्रैप का खतरा डेटिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल केवल कैफे बिल फ्रॉड तक सीमित नहीं है। इनका इस्तेमाल हनी-ट्रैप, ब्लैकमेलिंग और एक्सटॉर्शन जैसे अपराधों के लिए भी किया जा सकता है। दिल्ली में सामने आए मामलों में डेटिंग ऐप के जरिए लोगों को फंसाकर बाद में धमकाने और वसूली करने वाले गिरोहों का भी खुलासा हुआ है। आंकड़े बताते हैं साइबर फ्रॉड का बढ़ता खतरा उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जनवरी से अप्रैल 2024 के दौरान देशभर में 1,725 रोमांस/डेटिंग स्कैम की शिकायतें दर्ज हुई थीं, जिनमें करीब 13.23 करोड़ रुपए गंवाने की रिपोर्ट सामने आई थी। NCRB के 2024 के आंकड़ों के मुताबिक देश में 1,01,928 साइबर क्राइम मामले दर्ज हुए। इनमें 73,987 मामले यानी करीब 72.6 प्रतिशत साइबर फ्रॉड से जुड़े थे। डेटिंग प्लेटफॉर्म पर फर्जी प्रोफाइल और AI से तैयार तस्वीरों को लेकर भी लोगों के अनुभव सामने आए हैं। ऐसे में ऑनलाइन दोस्ती के दौरान पहचान की पुष्टि करना बेहद जरूरी हो गया है। पुलिस ने आमजन से अपील की कि साइबर ठगी का शिकार होने पर शर्म या सामाजिक डर के कारण चुप न रहें। फ्राइनेंशियल साइबर फ्रॉड की स्थिति में तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें। साथ ही राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराएं। जितनी जल्दी शिकायत की जाएगी, रकम को रोकने या ट्रांजेक्शन पर कार्रवाई की संभावना उतनी ही बढ़ सकती है।