राजस्थान हाईकोर्ट ने दीवानी मामलों पर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि मुख्य मुकदमे पर रोक लगने से निचली अदालत में अंतरिम स्थगन याचिका की सुनवाई नहीं रुकेगी। याचिकाकर्ता बद्रीलाल ने संपत्ति बंटवारे का मुकदमा और अंतरिम स्टे आवेदन दायर किया था। जस्टिस संजीत पुरोहित की बेंच ने बद्रीलाल की याचिका खारिज की थी। एफएसएल जांच आवेदन खारिज होने पर बद्रीलाल ने हाईकोर्ट से मुख्य मुकदमे पर रोक लगवा ली। उन्होंने ट्रायल कोर्ट में अंतरिम अर्जी की सुनवाई रोकने की मांग की, जिसे कोर्ट ने ठुकरा दिया। मुख्य मुकदमे और अंतरिम राहत के मकसद अलग हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुख्य मुकदमे और अंतरिम राहत के मकसद अलग हैं। मुख्य मुकदमा अधिकारों पर अंतिम फैसला देता है, जबकि अंतरिम अर्जी संपत्ति सुरक्षित रखती है। उच्च अदालत की स्पष्ट रोक के बिना निचली अदालत अंतरिम अर्जी पर सुनवाई जारी रख सकती है।