राजस्थान में मेडिकल कॉलेजों के निर्माण के टेंडर में गत कांग्रेस सरकार पर घोटालों के आरोप लगे हैं। टेंडर के लिए पात्रता की शर्त बदलकर एक खास फर्म को फायदा पहुंचाया गया था। RTI से मिले डॉक्यूमेंट्स के आधार पर यह खुलासा हुआ है। RTI कार्यकर्ता अशोक पाठक ने मुख्य सचिव को शिकायत भेजकर मामले की जांच की मांग की है। शिकायत में तत्कालीन PWD मंत्री भजनलाल जाटव और RSRDC के तत्कालीन अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र जांच होना बाकी है। पहले सामान्य भवन का अनुभव, बाद में मेडिकल कॉलेज की शर्त शिकायत के मुताबिक, केंद्र सरकार की योजना के तहत प्रदेश के जिलों में मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए शुरुआत में HSCC को कार्यकारी एजेंसी बनाया गया था। अलवर, बांसवाड़ा, दौसा, हनुमानगढ़, नागौर और पाली के टेंडर में सामान्य रूप से 5 मंजिला भवन बनाने का अनुभव रखने वाली कंपनियां हिस्सा ले सकती थीं। बाद में निर्माण की जिम्मेदारी RSRDC को दी गई। 2022 में टेंडर की पात्रता शर्तों में बदलाव कर 'G+3 मंजिल और 75 बेड वाले एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भवन' बनाने का अनुभव अनिवार्य कर दिया गया। दावा- नई शर्त से ज्यादातर ठेकेदार बाहर शिकायतकर्ता का दावा है कि उस समय राजस्थान में इस तरह के काम का अनुभव केवल मेसर्स रमेश कुमार बंसल के पास था। फर्म ने जयपुर के प्रतापनगर में RUHS एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का निर्माण किया था। आरोप है कि नई शर्त लगने के बाद दूसरे ठेकेदार सीधे टेंडर में प्रतिस्पर्धा नहीं कर सके। उन्हें इसी फर्म के साथ JV ( जॉइंट वेंचर) या सबलेट के जरिए काम लेना पड़ा। शिकायतकर्ता के अनुसार, इसके बाद कई टेंडर रमेश कुमार बंसल या उनके JV पार्टनर्स को मिले। मंत्री ने खुद लिया RSRDC चेयरमैन का चार्ज शिकायत में RSRDC की वित्तीय शक्तियों में बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि 21 नवंबर 2021 को मंत्री बनने के बाद तत्कालीन PWD मंत्री भजनलाल जाटव ने RSRDC चेयरमैन का चार्ज भी संभाला। इसके बाद चेयरमैन की वित्तीय शक्ति 50 करोड़ से बढ़ाकर 150 करोड़ रुपए करने और MD की वित्तीय शक्ति 25 करोड़ से घटाकर 15 करोड़ रुपए करने का आरोप है। शिकायत में JV की हिस्सेदारी का अनुपात भी 99:01 से बदलकर 70:30 किए जाने की बात कही गई है। 18 महीने में पूरा होना था काम, 50-60 महीने बाद भी अधूरा शिकायत के मुताबिक, मेडिकल कॉलेजों के निर्माण का काम 18 महीने में पूरा होना था, लेकिन कई काम 50 से 60 महीने बीतने के बाद भी पूरे नहीं हुए। देरी की स्थिति में अनुबंध के अनुसार 10% तक पेनल्टी का प्रावधान होने का दावा किया गया, लेकिन देरी के बावजूद संबंधित फर्मों से पेनल्टी वसूलने की कार्रवाई नहीं की गई। भजनलाल जाटव बोले- आरोप निराधार मामले में पूर्व PWD मंत्री और वर्तमान में धौलपुर-करौली से कांग्रेस सांसद भजनलाल जाटव का कहना है कि यह सारे आरोप निराधार हैं। उस समय टेंडर के सारे निर्णय बोर्ड मिलकर लेता था। मेरे अकेले के निर्णय लेने से टेंडर नहीं हुए थे। उस समय सारे काम नियम से हुए।