राजस्थान देवस्थान विभाग की मुख्यमंत्री वरिष्ठ नागरिक निःशुल्क तीर्थ यात्रा योजना में यात्रा पर गए बुजुर्गों ने कई गंभीर आरोप लगाए है। उदयपुर से 970 यात्री 10 अक्टूबर को विशेष ट्रेन से बंगाल के गंगासागर गए थे। बुजुर्ग यात्रियों ने आरोप लगाया कि कोलकाता पहुंचने के बाद उन्हें करीब 6 घंटे तक सड़क पर बैठना पड़ा। कोलकाता से आगे 130 किलोमीटर का सफर बस से तय करना था। इस दौरान टॉयलेट के लिए भी बस को नहीं रोका गया। होटल में भी तय सुविधाएं नहीं मिलीं। एक-एक कमरे में 6 से 8 लोगों को ठहराया गया। होटल में सुबह 11 बजे तक चाय-नाश्ता नहीं मिला। दो रोटी के बाद तीसरी रोटी देने से मना कर दिया गया। यात्रियों ने उनकी सहायता के लिए लगाए गए कर्मचारियों पर भी धमकाने का आरोप लगाया। दैनिक भास्कर ने ट्रेन में सफर कर रहे बुजुर्ग यात्रियों से बातचीत की और इन अव्यवस्थाओं के बारे में जानें। पढ़िए किसने क्या कहा- टायॅलेट के लिए भी रास्ते में बस को नहीं रोका ट्रेन के कोच नंबर 6 में यात्रा कर रहे यात्री नरपत ने बताया कि वे 10 अक्टूबर को अजमेर से ट्रेन में बैठे थे। उदयपुर और अजमेर संभाग के यात्रियों को लेकर विशेष ट्रेन कोलकाता पहुंची। यहां से धार्मिक स्थलों तक ले जाने के लिए बसों की व्यवस्था की गई थी। बस में काफी बुजुर्ग महिलाएं थीं। उन्होंने कहा कि ठेकेदार के कर्मचारी राहुल से टॉयलेट के लिए बस रोकने को कहा, लेकिन पूरे रास्ते में बस को रोका नहीं गया। आगे जाकर बस सड़क पर रोक दी गई। वहां न सरकारी अटेंडेंट था और न ही कोई दूसरा कर्मचारी। करीब 4 घंटे इंतजार करने के बाद हम सभी बुजुर्ग सड़क पर बैठे रहे। करीब 6 घंटे तक सड़क पर इंतजार करना पड़ा। बाद में पुलिसकर्मी वहां पहुंचे। उनके पूछने के बाद अटेंडेंट को बुलाया गया। पूरियां इतनी सख्त कि, बुजुर्गों से खाई नहीं गई नरपत ने बताया कि होटल में दो लोगों के ठहरने की व्यवस्था बताई गई थी। इसके बाद भी एक कमरे में चार लोगों को रुकने के लिए कहा गया। कई कमरों में 7 से 8 लोगों को ठहराया गया। सुबह 11 बजे होटल से चेक आउट करना था। तब तक कोई चाय-नाश्ता का इंतजाम नहीं था। उन्होंने बताया कि बस रवाना हो गई और आगे सड़क पर ही खाना दिया गया। खाना देखकर लग रहा था कि रात का बना हुआ है। पूरियां इतनी सख्त थीं कि कई बुजुर्गों से खाई नहीं गईं। पीने के लिए पानी तक नहीं दिया गया। यात्रा में उनके साथ लगाया गया अटेंडेंट ट्रेन और बस में कभी नजर नहीं आया। बुजुर्गों को टॉयलेट जाना हो या किसी दूसरी मदद की जरूरत हो, साथ में जिम्मेदार कर्मचारी नहीं मिलते थे। उनका आरोप है कि यात्रा 16 अक्टूबर को पूरी होनी है लेकिन इससे पहले ही ठेकेदार के कर्मचारी उनसे जबरदस्ती फॉर्म भरवा रहे हैं। बदबूदार और खराब खाना दिया गया यात्री ओमप्रकाश कुमावत ने बताया कि खाने के समय दो रोटी के बाद तीसरी रोटी देने से मना कर दिया गया। खाना भी बदबूदार था और खराब हो चुका था। गंगासागर से आगे ले जाकर यात्रियों को छोड़ दिया गया। देर रात तक बुजुर्ग सड़क पर रहे और कर्मचारी होटल तलाशते रहे। कुछ यात्रियों को पर्चियां देकर अगले दिन सुबह आने के लिए कहा गया। उन्होंने बताया कि थ्री स्टार होटल में ठहराने के बजाय धर्मशाला में रखा गया। कमरों में बेड की व्यवस्था ठीक नहीं थी। बाथरूम में पानी नहीं आ रहा था। करीब 130 किलोमीटर की बस यात्रा में टॉयलेट के लिए कहीं बस नहीं रोकी गई। बुजुर्गों को पूरे रास्ते परेशानी उठानी पड़ी। एक कमरे में 6 से 8 बुजुर्ग, सुबह की चाय भी नहीं मिली ओमप्रकाश ने बताया कि एक कमरे में 6 से 8 लोगों को ठहराया गया। पीने के पानी और सुबह की चाय तक की व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों ने यात्रियों के साथ ठीक व्यवहार नहीं किया और शिकायत करने पर धमकाया गया। ट्रेन में सफर कर रहे दूसरे यात्रियों ने भी चाय-नाश्ते को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि सुबह 4 से 5 बजे उठने के बावजूद 8 बजे तक चाय नहीं मिली। बाद में दी गई चाय ठंडी थी और दूध जला हुआ था। यात्रियों का कहना है कि यात्रा में बुजुर्गों की जरूरतों का ध्यान नहीं रखा गया, जबकि सरकार की ओर से अटेंडेंट और दूसरे कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। 970 यात्रियों के साथ 30 कर्मचारी लगाए थे देवस्थान विभाग की मुख्यमंत्री वरिष्ठ नागरिक निःशुल्क तीर्थ यात्रा योजना के तहत 10 अक्टूबर को उदयपुर के राणा प्रताप नगर रेलवे स्टेशन से गंगासागर के लिए विशेष ट्रेन रवाना हुई थी। ट्रेन में उदयपुर संभाग के 435 वरिष्ठ नागरिकों के साथ अजमेर और भरतपुर संभाग के यात्री भी शामिल थे। कुल 970 बुजुर्ग यात्रा पर गए थे। यात्रा कार्यक्रम के अनुसार- ट्रेन 12 अक्टूबर को गंगासागर पहुंची थी। इसके बाद कोलकाता में बेलूर मठ सहित दूसरे धार्मिक स्थलों के दर्शन कराने थे। ट्रेन को 16 अक्टूबर को वापस लौटना था। यात्रियों की सहायता के लिए 30 कर्मचारियों का स्टाफ लगाया गया था। हर कोच में दो सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी तय की गई थी। स्वास्थ्य सहायता के लिए एक डॉक्टर और दो नर्सिंगकर्मियों को भी साथ भेजने की जानकारी दी गई थी।