राजस्थान रोडवेज के 19 कंडक्टरों ने जॉइनिंग के 15 से 60 दिन के अंदर नौकरी से इस्तीफा दे दिया। इनमें कई ऐसे हैं, जिनका सिलेक्शन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (ग्रेड फोर्थ) की भर्ती में हो गया। यानी उन्होंने कंडक्टर के पद की जगह चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर जाने का फैसला किया। कुछ कर्मचारियों को चिकित्सा विभाग, शिक्षक भर्ती और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) में भी नौकरी मिली है, जबकि कुछ ने पढ़ाई जारी रखने, परिवार और स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला दिया है। रोडवेज ने इन 19 कंडक्टरों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं। ये अलग-अलग डिपो में तैनात थे। रिजाइन करने वाले इन कंडक्टर्स का परिचालक (कंडक्टर) भर्ती परीक्षा-2024 में सिलेक्शन हुआ था। 11 अगस्त 2026 को इनकी जॉइनिंग हुई थी। दूसरे विभाग में नौकरी मिली तो दिया इस्तीफा रोडवेज के कई कंडक्टरों का सिलेक्शन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती-2024 में हुआ है। इनमें बाड़मेर डिपो की गंगा चौधरी, डीडवाना डिपो के संजय कुमार, गंगानगर डिपो के केशव, सीकर डिपो की मंजू राड और टोंक डिपो के बनवारी लाल सैनी शामिल हैं। अलवर डिपो के जितेन्द्र का सिलेक्शन चिकित्सा विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर हुआ है। नागौर डिपो के सुभाष शर्मा का शिक्षक भर्ती में सिलेक्शन हुआ है। झुंझुनूं डिपो के सुरेन्द्र सिंह का सिलेक्शन जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) में हुआ है। इन सभी ने दूसरी नौकरी मिलने के बाद रोडवेज से इस्तीफा दे दिया। किसी ने पढ़ाई तो किसी ने निजी कारणों से छोड़ी नौकरी 11 कंडक्टरों ने आगे की पढ़ाई जारी रखने, स्वास्थ्य और पारिवारिक कारणों के चलते नौकरी छोड़ने की बात लिखी है। सवाई माधोपुर डिपो के हरसहाय मीना ने परिवार की परिस्थितियों और आगे पढ़ाई जारी रखने के लिए नौकरी छोड़ी। टोंक के प्रियांशु कुमार बंसीवाल ने आगे की पढ़ाई और दूसरी भर्ती परीक्षाओं की तैयारी के लिए इस्तीफा दिया। अलवर डिपो के दीपक धाखड़ और फलोदी के राजेन्द्र ढाका ने स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के कारण नौकरी छोड़ी। सीकर की कमलेश कुमारी और नागौर के घनश्याम शर्मा ने व्यक्तिगत और पारिवारिक कारण बताए। झालावाड़ के सौरभदेव राठौड़, वैशालीनगर के विकास कुमार, अंशु सिंघल और बारां के राहुल सहरिया ने भी निजी कारणों से इस्तीफा दिया। हिंडौनसिटी के गौरेन्द्र सैनी ने अपनी इच्छा से नौकरी छोड़ी। रोडवेज में त्योहारों पर छुट्टी मिलना मुश्किल, काम का दबाव ज्यादा एक्सपर्ट के अनुसार, राजस्थान रोडवेज की नौकरी कॉरपोरेशन की नौकरी होती है। ये सेमी गवर्नमेंट जॉब है। कंडक्टर की नौकरी में कॉर्पोरेशन के रूल्स के हिसाब से 6 दिन काम करना होता है। सप्ताह में एक ही दिन छुट्टी मिलती है। यह एसेंशियल सर्विस में आती है, इसलिए त्योहारों पर भी छुट्टी मिलना मुश्किल होता है। कंडक्टरों को डे और नाइट शिफ्ट में ड्यूटी करनी पड़ती है और नौकरी में काम का दबाव ज्यादा होता है। वहीं, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नौकरी राज्य सरकार की जॉब है। इसमें काम का दबाव अपेक्षाकृत कम होता है। इसमें ऑफिस से जुड़े सामान्य काम करने होते हैं। इस नौकरी में 5 दिन वर्किंग और 2 दिन वीकली ऑफ मिलता है। इसके अलावा छुट्टियां लेने की सुविधा भी बेहतर होती है। ऐसे में जब रोडवेज में काम करने वाले युवाओं को चतुर्थ श्रेणी या दूसरी सरकारी नौकरी में बेहतर अपॉर्च्युनिटी मिलती है, तो वे रोडवेज की नौकरी छोड़कर वहां जाना पसंद करते हैं।