राजस्थान में ग्रेड फोर्थ भर्ती परीक्षा में नियुक्त करीब 900 कैंडिडेट्स से हॉस्टल्स में खाना बनवाने का काम कराया जा रहा है। इन्हीं कर्मचारियों से चौकादीरी भी करवाई जा रही है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने भी इन्हें रसोइया और चौकीदार पद पर स्थायी बता दिया, जबकि इन पदों के लिए भर्ती विज्ञापन जारी ही नहीं हुआ था। ग्रेड फोर्थ पदों के लिए नियुक्त कैंडिडेट्स के पास खाना बनाने का कोई अनुभव नहीं है। करीब 30-35 कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग पहुंचे हैं और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने ग्रेड फोर्थ कर्मचारी के पद के लिए 2025 भर्ती परीक्षा दी थी। परीक्षा पास करने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि उनकी नियुक्ति चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के मूल पद पर मिलेगी। उन्हें उसी के अनुसार जिम्मेदारी दी जाएगी, लेकिन नियुक्ति के बाद कई कर्मचारियों से रसोई में खाना बनाने, चौकीदारी सहित अन्य काम करवाए जा रहे हैं। 2025 में हुई थी भर्ती सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने कहा कि करीब 100 विभागों के लिए ग्रेड फोर्थ भर्ती परीक्षा हुई थी, जिसका 19 से 21 सितंबर 2025 के बीच आयोजन हुआ था। परीक्षा के बाद 53 हजार 749 कैंडिडेट को 28 अगस्त 2026 में नियुक्तियां मिली। इनमें से 900 कर्मचारियों से रसोइया और चौकीदारी का काम करवाया जा रहा है। खाना बनाना नहीं आता कर्मचारी यशंवत शर्मा का कहना है कि वे देवनरारायण हॉस्टल चितौड़गढ़ में पोस्टेड है औंर उनसे अब वहां पर स्टूडेंट्स के लिए खाना बनवाया जा रहा है। उनका कहना है कि खाना बनाने में वे स्किल्ड नहीं हैं, फिर भी ये काम करवाया जा रहा है। शुरुआत में ये कहा गया था कि थोड़ी हेल्प करा दो, लेकिन कुछ दिन बाद ये कहा गया कि अब ये पूरा काम आपको ही करना पड़ेगा। रसोइया आपका पद है। आप यहां स्थायी कर्मचारी हो। यशवंत ने कहा कि विभाग को हमने प्रार्थना पत्र भी दिया है जिसमें बताया है कि हम खाना बनाने में समर्थ नहीं हैं और यदि बच्चों के स्वास्थ्य के साथ कुछ होता है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। उन्होंने कहा कि मैं चित्तौड़गढ़ के देवनारायण हॉस्टल में पोस्टेट हूं, वहां मुझसे खाना बनवाया जा रहा है। एक दिन खाना बनाते समय मेरा हाथ जल गया था। हमसे ये काम करवाया जा रहा है,लेकिन हम ये काम बिल्कुल नहीं करेंगे। विभाग ने कहा- सीटें नहीं हैं अभ्यर्थियों का कहना है कि चतुर्थ श्रेणी में रसोइए के पद का कोई प्रावधान नहीं है, लेकिन विभाग द्वारा ये कहकर रसोइया बनाया जा रहा है सीटें खाली नहीं है। वहीं फागी के रहने वाले कर्मचारी का कहना है कि जिस पद के लिए हमारा चयन हुआ, उसमें हमें पोस्टिंग ही नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि रसोइए की जॉब स्किल्ड होती है, जबकि हमारे इसको लेकर कोई स्किल नहीं है। इससे हम बच्चों के लिए खाना कैसे बनाएंगे। ड्यूटी टाइम फिक्स नहीं कर्मचारियों का कहना है कि हमारी ड्यूटी का कोई टाइम फिक्स नहीं है, वहीं साप्ताहिक अवकाश भी नहीं मिल रहा है। उन्होंने ड्यूटी टाइम फिक्स करने और साप्ताहिक अवकाश देने की मांग की है।