सपा मुखिया अखिलेश यादव ने राज्यसभा चुनाव में धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाकर चौंका दिया है। नथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज के ग्रुप प्रेसिडेंट हैं। उन्हें जाने-माने बिजनेसमैन मुकेश अंबानी का करीबी माना जाता है। इसके अलावा, अखिलेश ने चाचा रामगोपाल यादव को उम्मीदवार बनाया है। सपा मुखिया खुद दोनों के नामांकन के दौरान मौजूद रहे। धनराज के पिता परिमल नथवानी झारखंड से निर्दलीय राज्यसभा सांसद हैं। 3 महीने पहले NDA के समर्थन से राज्यसभा पहुंचे थे। यही वजह है कि अखिलेश के फैसले के बाद सियासी चर्चाएं तेज हैं। सपा सरकार में मुख्य सचिव रहे आलोक रंजन साइडलाइन कर दिए गए हैं। उनका नाम राज्यसभा के लिए तय माना जा रहा था। विधायकों के साथ 28 सितंबर को हुई बैठक में भी अखिलेश ने आलोक के नाम का जिक्र किया था। कहा था- वे पिछली बार रह गए थे। इस बार हम चाहते हैं कि कोई चूक न हो। सीनियर जर्नलिस्ट आवेश तिवारी कहते हैं- यह बेशर्मी है। सपा ने सारी मर्यादाओं को ताक पर रखकर धनराज को राज्यसभा का टिकट दिया है। परिमल मोदी-शाह के खासमखास हैं। हमें लगता है कि टिकट अमित शाह के दबाव में दिया गया है। यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव होना है। NDA को 8 और सपा को 2 सीटें मिलना तय है। हालांकि, सपा ने तीसरे उम्मीदवार को लेकर सस्पेंस बना रखा है। सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश नथवानी के नामांकन के बाद राजनीतिक माहौल परख रहे हैं। तीसरे उम्मीदवार के तौर पर सलीम इकबाल शेरवानी के नाम की भी चर्चा है। नथवानी को टिकट देने से सपा को क्या फायदा? ऐन वक्त पर आलोक रंजन का नाम क्यों कटा? आलोक रंजन, अखिलेश यादव के बेहद करीबी रणनीतिकारों में से एक बताए जाते हैं। लेकिन, आलोक के नाम पर पार्टी में विरोध के चलते वे इस बार भी राज्यसभा जाने से चूक गए। आलोक कायस्थ समाज से आते हैं। इससे न तो PDA का फॉर्मूला पूरा हो रहा था और न ही अन्य कोई खास फायदा (जैसे फंडिंग) हो सकता था। आलोक को 2024 राज्यसभा चुनाव में सपा ने तीसरे उम्मीदवार के रूप में उतारा था। लेकिन, सपा के 7 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर दी। इस वजह से आलोक हार गए थे। दैनिक भास्कर पोल में हिस्सा लेकर राय दें- राजभर का तंज- PDA यानी परिवार, दौलतमंद और अपराधी कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने X पर तंज कसते हुए लिखा- ‘अखिलेश जी, सुना है आप राज्यसभा के लिए तीन प्रत्याशी मैदान में उतारने जा रहे हैं। ये बताइए, तीनों आपके PDA वाले होंगे या नहीं? पहला तो प्रोफेसर साहब हैं। बताइएगा, क्योंकि सभी पिछड़े वर्ग के लोग, दलित भाई और मुसलमान भाई जानना चाह रहे हैं कि आपके PDA में परिवार, दौलतमंद और अपराधियों को कैसे आप संसद के ऊपरी सदन भेजने की जुगत में लगे हैं।’ कांग्रेस बोली- धनकुबेरों को जनता के हित की चिंता नहीं होती परिमल को टिकट देने पर कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सीपी राय ने कहा- अच्छा होता कि सपा प्रमुख किसी कार्यकर्ता को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाते। ऐसे धनकुबेरों को जनता के हित की चिंता नहीं होती है। नामांकन के समय सतीश महाना के कक्ष में घुसे मंत्री राकेश सचान अखिलेश यादव जब विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के कक्ष में नामांकन करा रहे थे। उसी समय यूपी सरकार के खादी ग्रामोद्योग मंत्री राकेश सचान भी वहां पहुंच गए। लेकिन मार्शल ने उन्हें अंदर नहीं घुसने के बजाय गेट पर ही रोक दिया। काफी देर बाद वे बड़ी मुश्किल से अंदर घुसे। मई में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद राकेश सचान से एमएसएमई विभाग लेकर भूपेंद्र चौधरी को दे दिया गया। माना जा रहा है कि इसके बाद से ही राकेश सचान बीजेपी से नाराज है। अब उनके पास केवल खादी ग्रामोद्योग विभाग ही है। राकेश सचान 2022 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी से भाजपा में शामिल हुए थे। गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं धनराज धनराज परिमल नथवानी ने 2022 में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बाद गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन का पद संभाला था। इससे पहले वे एसोसिएशन के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। नरेंद्र मोदी स्टेडियम के निर्माण में अहम भूमिका निभाई थी। द्वारका देवस्थान समिति के उपाध्यक्ष भी हैं। धनराज के पिता परिमल 3 महीने पहले चौथी बार राज्यसभा सांसद बने 2 कैंडिडेट का चुना जाना तय, तीसरे के लिए 12 और विधायकों की जरूरत यूपी विधानसभा में कुल सीटों की संख्या 403 है। मौजूदा समय में 7 सीटें खाली हैं। यानी, मौजूदा समय में 396 विधायक हैं। राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव के लिए जो फॉर्मूला अपनाया जाएगा, वह 396/11+1 होगा। यानी 396 को 11 से भाग देने पर जो संख्या आएगी, उसमें एक जोड़ा जाएगा। यानी एक सदस्य को चुनने के लिए 37 प्रथम वरीयता वोट की जरूरत पड़ेगी। सपा के पास मौजूदा समय में 100 विधायक ही हैं। इसमें से भी रमाकांत यादव जेल में बंद हैं। यानी संख्या घटकर 99 रह जाती है। ऐसे में सपा को तीसरे प्रत्याशी को जिताने के लिए कम से कम 12 और वोटों की जरूरत पड़ेगी। सपा को ऐसे प्रत्याशी की तलाश है, जो इस अंतर को खत्म कर सके। भाजपा को 8वां कैंडिडेट जिताने के लिए 6 वोटों की जरूरत पड़ेगी वहीं, भाजपा को 8वां कैंडिडेट जिताने के लिए कम से कम 6 वोटों की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में दूसरी और तीसरी वरीयता के वोटों की गिनती अहम हो जाती है। इसके लिए विधायकों को बकायदा प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्हें बताया जाता है कि किस विधायक को किस कैंडिडेट के लिए प्रथम वरीयता पर रखना है और किसे दूसरी व तीसरी वरीयता पर। इसी तरह गिनती में निर्धारित कोटे तक पहुंचने पर संबंधित प्रत्याशी को विजयी घोषित कर दिया जाता है। ---------------------------- ये खबर भी पढ़िए- भाजपा को ‘सरप्राइज’ देने की तैयारी में अखिलेश:10 विधायक तोड़कर राज्यसभा में तीसरी सीट जीतने की तैयारी...?; क्या है पूरा प्लान यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव है। इसके प्रत्याशियों को लेकर सोमवार (28 सितंबर) को प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब अखिलेश यादव से सवाल पूछा गया तो वे बोले, ‘सरप्राइज के लिए तैयार रहिए…।’ आज यूपी एक्सप्लेनर में अखिलेश के इसी ‘सरप्राइज प्लान’ को डिकोड करेंगे। पूरी खबर पढ़िए