रणथंभौर टाइगर रिजर्व में नर बाघ T-108 जय के चेहरे के पास चोट के निशान दिखाई दिए हैं। प्रारंभिक आकलन में किसी अन्य नर बाघ के साथ क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर संघर्ष की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, बाघ को चोट किस परिस्थिति में लगी, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। चोट के निशान सामने आने के बाद वन विभाग सतर्क हो गया है और बाघ की गतिविधियों के साथ उसके स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा रही है। वन विभाग की टीम कर रही मॉनिटरिंग रणथंभौर टाइगर रिजर्व प्रथम के डीएफओ मानस सिंह ने बताया- विभाग की फील्ड टीम बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही है और उसके मूवमेंट को ट्रैक किया जा रहा है। वहीं, रणथंभौर टाइगर रिजर्व के वाइल्डलाइफ हॉस्पिटल की टीम भी बाघ की स्थिति की निगरानी कर रही है और उसके स्वास्थ्य का आकलन कर रही है। वन विभाग की टीमें संबंधित क्षेत्र में नियमित निगरानी बनाए हुए हैं, ताकि बाघ की स्थिति में किसी भी तरह के बदलाव का समय रहते पता लगाया जा सके। फिलहाल विभाग का ध्यान बाघ की गतिविधियों और स्वास्थ्य पर नजर रखने पर केंद्रित है। निगरानी के दौरान मिलने वाली जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। क्षेत्रीय वर्चस्व के संघर्ष की आशंका रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघों के बीच क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर संघर्ष होना वन्यजीवों के स्वाभाविक व्यवहार का हिस्सा हो सकता है। T-108 के चेहरे पर चोट के निशान मिलने के बाद भी ऐसी ही आशंका जताई जा रही है, लेकिन अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है। वन विभाग के अनुसार, वन्यजीवों का संरक्षण और उनकी सुरक्षा प्राथमिकता है। जोन 6 से 10 तक फैला है जय का इलाका रणथंभौर नेशनल पार्क में T-108 को जय के नाम से भी जाना जाता है। इसे प्रसिद्ध नर बाघ माना जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसका इलाका जोन 6 से 10 तक फैला हुआ है। करीब 9 साल का जय, बाघिन T-8 लाडली और नर बाघ T-34 कुंभा की संतान है। फिलहाल वन विभाग की टीमें जय की गतिविधियों और स्वास्थ्य की निगरानी कर रही हैं। उसकी स्थिति को लेकर आगे की जानकारी निगरानी और आकलन के आधार पर सामने आएगी।