शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और सरकारी योजनाओं की जमीनी क्रियान्विति सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग ने जिला प्रभारियों की नियुक्ति की है। शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव निदेशालय और स्कूल शिक्षा परिषद में कार्यरत आरएएस और शिक्षा अधिकारियों को 41 जिलों में प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी है। यह अधिकारी स्कूलों का निरीक्षण कर विभागीय योजनाओं की प्रगति करेंगे। साथ ही शिक्षा व्यवस्था, नामांकन और जर्जर स्कूल भवन व कक्षा-कक्षों की रिपोर्ट तैयार करेंगे। अगर भवन व कक्षा-कक्ष जर्जर मिला तो वहां ताला लगाकर लाल रंग से क्रास का निशान लगाएंगे। साथ ही ऐसे भवनों को जमीदोंज करने को लेकर कार्रवाई शुरू करेंगे। अधिकारियों को पीएम श्री स्कूल, आवासीय स्कूलों सहित विभाग के सभी प्रकार के स्कूलों का निरीक्षण करना होगा। स्थानीय स्तर पर दूर की जा सकने वाली कमियों का मौके पर निस्तारण कराएंगे। वरिष्ठ उप सचिव कानाराम को जयपुर का प्रभारी लगाया गया है। भवन, बालिका सुरक्षा और शौचालयों की जांच स्कूल भवनों की भौतिक स्थिति और सुरक्षा निरीक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। निरीक्षण के दौरान बालिकाओं की सुरक्षा, सीसीटीवी, भवन एवं शौचालयों की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। असुरक्षित या जर्जर सरकारी स्कूल भवनों और कक्षा-कक्षों की पहचान कर दरवाजों पर लाल रंग से क्रॉस का निशान लगाया जाएगा। यदि आंगनबाड़ी केंद्र स्कूल परिसर में ही संचालित है, तो उसके भवन की भौतिक स्थिति और सुरक्षा की भी समीक्षा की जाएगी। इससे स्कूल परिसर में संचालित संबंधित व्यवस्थाओं की सुरक्षा पर निगरानी रखने का उद्देश्य है। दौरे के दौरान यह देखेंगे अधिकारी प्रमुख जिलों में इन अधिकारियों को जिम्मेदारी राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान परिषद की निदेशक श्वेता फगेडिया को उदयपुर, अतिरिक्त निदेशक माध्यमिक शिक्षा शैलेंद्र देवडा को डीडवाना, राज्य शैक्षिक प्रबंधन व प्रशिक्षण संस्थान गोनेर डॉ. नरेंद्र चौधरी को बीकानेर, अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक सीमा शर्मा प्रथम को अजमेर, वित्तीय सलाहकार कृष्णपाल को जोधपुर, राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल की सचिव अरूणा शर्मा को कोटा का प्रभारी लगाया गया है। नामांकन लक्ष्य, स्कूलों की व्यवस्थाएं पीएम श्री विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) में निर्धारित क्षमता एवं लक्ष्य के अनुरूप नामांकन की समीक्षा की जाएगी। अधिकारियों को नामांकन लक्ष्य की शत-प्रतिशत पूर्ति के लिए किए गए प्रयासों की जानकारी लेनी होगी। स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों की ओर से किए गए नवाचारों का विवरण भी निरीक्षण में शामिल रहेगा।