हर निकाय में नामांकन दाखिल करने के बाद आज से शुरू होगी बोर्ड बनाने की रणनीति भाजपा ने स्थानीय नेताओं, जिलाध्यक्षों, विधायकों व निकाय प्रभारियों को बोर्ड बनाने की जिम्मेदारी दी है। वहीं अल्पमत वाले निकायों में बोर्ड बनाने की रणनीति पर पार्टी के वरिष्ठ नेता काम करेंगे। पार्टी की ओर से क्षेत्रीय व जातीय संतुलन को देखते हुए निर्दलीयों की खेमाबंदी की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके लिए दूसरे संभाग व जिलों में लगे नेताओं को जरूरत के हिसाब से लगाया जाएगा। इसके लिए भाजपा ने प्लानिंग तैयार की है। हर निकाय में नामांकन दाखिल करने के बाद बुधवार दोपहर से बोर्ड बनाने की रणनीति शुरू होगी। बोर्ड की डील में लगाए दो नेता लगाए: जिन निकायों में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला है, वहां पर बोर्ड बनाने की जिम्मेदारी जिलाध्यक्ष व विधायक को दी गई है। जहां पर बोर्ड बनाने निर्दलीयों की जरूरत है, वहां निकाय चुनाव के संभाग प्रभारी के साथ वरिष्ठ नेताओं को भी जिम्मेदारी दी गई है। भाजपा की बाड़ेबंदी में चेहरे तय, मुख्यालय में लगी अंतिम मुहर भाजपा की बाड़ेबंदी में पार्टी के मेयर व चेयरमैन चेहरों के नाम तय किए गए। इसके बाद सबके नाम भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ को भेजे गए। वहां पर प्रदेशाध्यक्ष की संगठन महामंत्री व निकाय चुनाव प्रभारी के साथ चर्चा हुई। इसके बाद तीनों नेता एक साथ सीएमआर पहुंचे। वहां पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से लंबा विचार-विमर्श हुआ। इसके बाद मंगलवार देर रात मेयर व चेयरमेन के नामांकन के लिए नाम भेजे गए। इससे पहले मंगलवार दोपहर को भाजपा प्रदेश कार्यालय से हर निकाय की जिम्मेदारी देते हुए विधायकों, जिलाध्यक्षों व निकाय प्रभारियों को विश्वास के आधार पर पार्टी का खाली सिंबल दिया गया। ताकि बुधवार सुबह तक नाम फाइनल होने पर पार्टी की ओर से नामांकन दाखिल किया जा सके। भितरघात करने और उदासीन रहने वालों की रिपोर्ट तैयार हो रही...फिर कार्रवाई निकाय चुनाव को लेकर भाजपा संगठन की ओर से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, पदाधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की भूमिका का बारीकी से आकलन होगा। इसके लिए प्रदेश भाजपा की ओर से ‘गोपनीय रिपोर्ट’ बनेगी। यह रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को भेजी जाएगी। इसमें निकाय चुनावों के परिणामों का एनालिसिस और नेताओं की भूमिका को तथ्यों को साथ रखा जाएगा। हर निकाय के परिणाम के आधार पर पार्टी के चुनिंदा नेता माइक्रो लेवल पर रिपोर्ट तैयार करने में जुटे हैं। जिला और स्थानीय स्तर से गोपनीय फीडबैक लिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि वरिष्ठ नेताओं की उदासीनता और भितरघात की वजह से पार्टी कई निकायों में हार गई। केंद्रीय पर्यवेक्षक भी देंगे गोपनीय रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व की ओर से भेजे गए पर्यवेक्षक भी अपने स्तर पर रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। प्रदेश संगठन की रिपोर्ट और पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट को मिलाकर चुनाव के बाद संगठन की स्थिति का आकलन किए जाने की संभावना है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर संगठनात्मक जिम्मेदारियों और भविष्य की रणनीति को लेकर फैसले लिए जा सकते हैं।