सवाईमाधोपुर| भाद्रपद शुक्ल पंचमी मंगलवार को ऋषि पंचमी का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर सप्तऋषियों की पूजा-अर्चना की गई। पंडित ताराचंद शास्त्री के अनुसार ऋषि पंचमी का व्रत आत्मशुद्धि का पर्व है। इस दिन कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ ऋषि का पूजन किया जाता है। कई स्थानों पर सप्तऋषियों के साथ माता अरुंधती की भी पूजा की जाती है। पर्व को लेकर सुबह श्रद्धालु स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किया जाता है। व्रत रखकर ऋषि पंचमी की कथा सुनने और पूजा के बाद ऋषियों से अपने जाने-अनजाने में हुए दोषों के लिए क्षमा प्रार्थना की जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार एक बार राजा सिताश्व ने ब्रह्माजी से पूछा कि ऐसा कौन सा व्रत है, जिससे मनुष्य अपने जीवन में जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति पा सकता है। इस पर ब्रह्माजी ने उन्हें ऋषि पंचमी व्रत का महत्व बताया। ऋषि पंचमी को केवल व्रत के रूप में ही नहीं, बल्कि भारतीय ऋषि परंपरा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के पर्व के रूप में भी देखा जाता है। सनातन परंपरा में सप्तऋषियों को ज्ञान, तप, संस्कार और धर्म का मार्ग दिखाने वाला माना गया है।